September 15, 2026

पाकिस्तान में अहमदिया मुस्लिमों पर जुल्म, UN ने जताई गहरी चिंता

balochistan pakistan

संयुक्त राष्ट्र (UN) में सोमवार (7 सितंबर) को पाकिस्तान में अहमदिया समुदाय पर हो रहे अत्याचारों का मुद्दा प्रमुखता से उठा। यूएन विशेषज्ञों ने पाकिस्तान में अहमदियों के खिलाफ हो रहे भेदभाव, हिंसा और कानूनी पाबंदियों की लगातार मिल रही रिपोर्टों पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने पाकिस्तानी हुकूमत से इस अल्पसंख्यक समुदाय की सुरक्षा तत्काल सुनिश्चित करने की मांग की है।

धार्मिक पहचान के कारण प्रताड़ना और मुकदमे विशेषज्ञों के मुताबिक, उन्हें लगातार ऐसी सूचनाएं मिल रही हैं कि अहमदिया समुदाय के लोगों को महज उनकी धार्मिक पहचान के कारण निशाना बनाया जा रहा है। उनके खिलाफ न सिर्फ आधारहीन मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं, बल्कि शारीरिक हिंसा भी हो रही है। यूएन की तरफ से जारी बयान में स्पष्ट किया गया कि हर व्यक्ति को विचार, धर्म या विश्वास की स्वतंत्रता का अधिकार है। किसी को भी शांतिपूर्ण तरीके से अपने धर्म का पालन करने से नहीं रोका जा सकता।

मस्जिदों पर हमले और त्योहारों में दखलंदाजी पाकिस्तान में अहमदिया मुस्लिमों की मस्जिदों पर हमले और कब्रों की बेअदबी की घटनाएं आम हो गई हैं। इसके अलावा हेट स्पीच, ईद-उल-फितर और ईद-उल-अजहा के दौरान दखलंदाजी और धार्मिक रीति-रिवाजों का पालन करने पर गिरफ्तारियां की जा रही हैं। यूएन ने इन सभी घटनाओं पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि यह राज्य की जिम्मेदारी है कि वह मानवाधिकारों का उल्लंघन रोके, आरोपों की निष्पक्ष जांच करे और दोषियों पर अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार मुकदमा चलाए।

‘अधिकारियों की मिलीभगत से होते हैं हमले’ विशेषज्ञों ने पाकिस्तानी तंत्र पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि अल्पसंख्यक समूहों पर होने वाले ये हमले अक्सर अधिकारियों की मिलीभगत से होते हैं। देश में डर का ऐसा माहौल कायम हो गया है जो लोगों और संस्थाओं को इन समुदायों के अधिकारों व सम्मान की रक्षा करने से रोकता है। विशेषज्ञों ने पाकिस्तान से इस बेरोकटोक छूट के सिलसिले को तोड़ने को कहा है, जिसके कारण नफरत और हिंसा भड़काने वाले बिना किसी रोक-टोक के काम कर रहे हैं।

कानूनों की समीक्षा की अपील हालिया ईद त्योहारों का जिक्र करते हुए यूएन अधिकारियों ने बताया कि पाकिस्तान में अहमदियों को एक ऐसी भेदभावपूर्ण व्यवस्था का सामना करना पड़ रहा है, जो सार्वजनिक जीवन से लेकर उनके घरों के भीतर तक फैल चुकी है। विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि केवल अपने धार्मिक त्योहारों को मनाने के लिए किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तारी, हिरासत या निगरानी का सामना नहीं करना चाहिए। संयुक्त राष्ट्र ने पाकिस्तानी सरकार से अपने उन सभी कानूनों और प्रशासनिक उपायों की समीक्षा करने को कहा है जो अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून के तहत उसकी जिम्मेदारियों के खिलाफ हैं।