September 20, 2026

टाटा संस में बड़ा उलटफेर, नोएल टाटा के विरोध के बावजूद एन चंद्रशेखरन फिर बने चेयरमैन

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देश के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित कारोबारी घराने ‘टाटा समूह’ (Tata Group) से एक बड़ी खबर सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, टाटा संस (Tata Sons) के बोर्ड ने गुरुवार को हुई एक अहम बैठक में एन चंद्रशेखरन (N Chandrasekaran) को अगले 5 वर्षों के लिए फिर से एग्जीक्यूटिव चेयरमैन नियुक्त करने को मंजूरी दे दी है। इस फैसले ने चंद्रशेखरन के उस पुराने फैसले को पलट दिया है, जिसमें उन्होंने पिछले महीने अपने पद से हटने का ऐलान किया था।

नोएल टाटा ने किया पुनर्नियुक्ति का विरोध

रिपोर्ट्स के अनुसार, चेयरमैन पद पर चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति का यह फैसला सर्वसम्मति से नहीं हुआ है। टाटा ट्रस्ट (जिसकी टाटा संस में लगभग 66% हिस्सेदारी है) के चेयरमैन नोएल टाटा (Noel Tata) ने चंद्रशेखरन के दूसरे कार्यकाल का कड़ा विरोध किया और इसके खिलाफ वोट भी डाला। हालांकि, बोर्ड के अन्य सदस्यों के भारी समर्थन के चलते यह प्रस्ताव बहुमत से पास हो गया। इस फैसले के बाद सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट द्वारा शुरू की गई नए चेयरमैन की चयन प्रक्रिया अब रोक दी जाएगी।

अगस्त में किया था पद छोड़ने का ऐलान

गौरतलब है कि बीते अगस्त महीने में ही एन चंद्रशेखरन ने घोषणा की थी कि वे 20 फरवरी 2027 को अपना मौजूदा कार्यकाल खत्म होने के बाद चेयरमैन का पद छोड़ देंगे। उन्होंने तर्क दिया था कि टाटा ग्रुप में उनके 40 साल पूरे हो चुके हैं और अब वे आगे काम नहीं करना चाहते। लेकिन बोर्ड के इस नए फैसले ने उन्हें दोबारा यह बड़ी जिम्मेदारी सौंप दी है।

RBI के निर्देशों और लिस्टिंग की चर्चाओं के बीच आया फैसला

यह अहम बैठक ऐसे समय में हुई है जब भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने हाल ही में टाटा संस को शेयर बाजार में लिस्ट कराने (IPO लाने) का निर्देश दिया है। इसके लिए कंपनी ने 21,000 करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज भी चुकाया है।

  • नोएल टाटा लंबे समय से टाटा संस की लिस्टिंग के खिलाफ रहे हैं।

  • वहीं, कंपनी में करीब 18 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाला शापूरजी पालोनजी (Shapoorji Pallonji) समूह इस लिस्टिंग के पक्ष में है।

ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में चंद्रशेखरन को दोबारा कमान मिलने से टाटा समूह में स्थिरता बनी रहने की उम्मीद जताई जा रही है।

कौन हैं एन चंद्रशेखरन?

कॉरपोरेट जगत में ‘चंद्रा’ के नाम से मशहूर नटराजन चंद्रशेखरन का सफर बेहद प्रेरणादायक रहा है।

  • तमिलनाडु के एक छोटे से गांव मोहनूर में जन्मे चंद्रशेखरन ने 1987 में एक इंटर्न के तौर पर टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) में कदम रखा था।

  • साल 2009 में, महज 46 साल की उम्र में वे TCS के CEO और MD बने।

  • साल 2017 में जब टाटा ग्रुप लीडरशिप संकट से गुजर रहा था, तब रतन टाटा ने उन पर भरोसा जताया। वे टाटा संस के चेयरमैन बनने वाले पहले गैर-पारसी शख्स हैं।

  • उनके नेतृत्व में टाटा ने कई बड़े मुकाम हासिल किए—एयर इंडिया की सफल वापसी, बिगबास्केट (BigBasket) का अधिग्रहण और सेमीकंडक्टर (Semiconductor) व इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) सेक्टर में भारी निवेश उनके कार्यकाल की प्रमुख उपलब्धियां हैं।