2013 दुष्कर्म मामला: तहलका के पूर्व संपादक तरुण तेजपाल ने गोवा की अदालत में किया सरेंडर
तहलका पत्रिका के पूर्व एडिटर-इन-चीफ तरुण तेजपाल ने 2013 के दुष्कर्म मामले में सोमवार को गोवा की मापुसा अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया है। तेजपाल ने यह कदम सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश के बाद उठाया है, जिसमें अदालत ने स्पष्ट किया था कि बॉम्बे हाईकोर्ट के दोषसिद्धि वाले फैसले के खिलाफ उनकी अपील पर सुनवाई से पहले उन्हें सरेंडर करना होगा। पिछले महीने शीर्ष अदालत ने तेजपाल की वह याचिका खारिज कर दी थी जिसमें उन्होंने सरेंडर से छूट की गुहार लगाई थी और उन्हें आत्मसमर्पण के लिए तीन सप्ताह का समय दिया था।
कपिल सिब्बल ने दी थी बिना सरेंडर सुनवाई की दलील
सुप्रीम कोर्ट में तेजपाल की पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत से अपने मुवक्किल के लिए राहत की मांग की थी। सिब्बल ने दलील दी थी कि अदालत के पास बिना आरोपी के सरेंडर किए भी आपराधिक अपील को सूचीबद्ध करने और उस पर सुनवाई करने का विशेष अधिकार है। बचाव पक्ष का तर्क था कि बॉम्बे हाईकोर्ट ने तेजपाल के बरी होने के फैसले को पलट दिया है, इसलिए पहले सुप्रीम कोर्ट में अपील के गुण-दोष पर विचार किया जाना चाहिए और उसके बाद सरेंडर की जरूरत तय की जाए।
गोवा सरकार का कड़ा विरोध और 10 साल की सजा का हवाला
तेजपाल की इस अर्जी का गोवा सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कड़ा विरोध किया। मेहता ने शीर्ष अदालत में दलील दी कि छूट की मांग पर मामले के गुण-दोष को ध्यान में रखकर ही विचार होना चाहिए। उन्होंने अदालत को बताया कि यह दुष्कर्म के गंभीर अपराध का मामला है और बॉम्बे हाईकोर्ट ने तेजपाल को 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।
होटल की लिफ्ट में यौन उत्पीड़न का है आरोप
यह मामला 11 साल पुराना है। एक महिला पत्रकार ने आरोप लगाया था कि 7 और 8 नवंबर 2013 को गोवा के एक होटल की लिफ्ट के अंदर तरुण तेजपाल ने उनका यौन उत्पीड़न किया। इन आरोपों के सामने आने के बाद काफी विवाद हुआ था और तेजपाल को 30 नवंबर 2013 को गिरफ्तार किया गया था। निचली अदालत और हाईकोर्ट में लंबी कानूनी लड़ाई के बाद, हाईकोर्ट ने उन्हें दोषी करार दिया, जिसे अब तेजपाल ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
