सुल्तानपुर: फर्जी हस्ताक्षर से 26 मतदाताओं के नाम कटवाने के मामले में चुनाव आयोग की बड़ी कार्रवाई, BLO पर मुकदमा दर्ज

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उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर में फर्जी हस्ताक्षर के जरिए मतदाता सूची से 26 लोगों के नाम काटने की शिकायत पर चुनाव आयोग ने सख्त कार्रवाई की है। समाजवादी पार्टी (SP) द्वारा की गई इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए आयोग ने संबंधित बूथ लेवल अधिकारी (BLO) को चुनाव कार्य से हटा दिया है और उसके खिलाफ गोसाईगंज थाने में FIR दर्ज कराई गई है।

थाने में दर्ज हुई FIR, अन्य कर्मचारियों पर भी लटकी तलवार

सपा ने इस पूरे मामले में एक सोची-समझी साजिश का आरोप लगाया था। इस मामले में संबंधित बीएलओ सुपरवाइजर की ओर से 24 अक्टूबर को गोसाईगंज थाने में बीएनएस (भारतीय न्याय संहिता) की धारा 336 (3), 340 (2) और 318 (4) के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज करा दी गई है। इसके साथ ही इस बात की जांच भी की जा रही है कि फर्जी फॉर्म-7 किसने जमा किए थे। इस जांच के दायरे में कई अन्य कर्मियों पर भी कार्रवाई की तलवार लटक गई है।

क्या है पूरा मामला?

15 अक्टूबर 2026 को समाजवादी पार्टी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर इस मामले का खुलासा किया था। पार्टी ने आरोप लगाया था कि नंदलाल नामक एक व्यक्ति के फर्जी हस्ताक्षर बनाकर फॉर्म-7 (मतदाता सूची से नाम हटाने का फॉर्म) भरकर 26 लोगों के नाम काटने की सिफारिश की गई थी। सपा का दावा था कि नंदलाल हस्ताक्षर नहीं करते, बल्कि अंगूठा लगाते हैं।

इस शिकायत के बाद चुनाव आयोग तुरंत हरकत में आया और सुल्तानपुर के जिला निर्वाचन अधिकारी से रिपोर्ट तलब की। जांच में सामने आया कि यह मामला सुल्तानपुर सदर विधानसभा-189 के बूथ संख्या 96 का है। यहां वास्तव में नंदलाल के फर्जी हस्ताक्षर वाले फॉर्म-7 जमा किए गए थे। इन फॉर्म्स में न तो मतदाता पहचान पत्र (Voter ID) संलग्न था और न ही कोई मोबाइल नंबर दर्ज था। नियमों की इतनी अनदेखी के बावजूद बीएलओ ने इन फॉर्म्स को स्वीकार कर लिया, जिसके चलते उन्हें चुनाव ड्यूटी से हटा दिया गया।

वोटर लिस्ट में लगातार सामने आ रहीं गड़बड़ियां

यह कोई पहला मामला नहीं है। पिछले कुछ दिनों में उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों से मतदाता सूची में कई तरह की गंभीर गड़बड़ियां सामने आई हैं, जिसने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

पीलीभीत में एक ही ईपीआईसी (EPIC) कार्ड पर 13 हजार से ज्यादा एंट्रीज मिली थीं। इसके अलावा बस्ती, आजमगढ़ और गोरखपुर की कई विधानसभा सीटों पर भी डुप्लीकेट वोटरों की भरमार देखने को मिली है। इन घटनाओं को लेकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस लगातार चुनाव आयोग पर हमलावर हैं और इसे आगामी चुनावों में धांधली की योजना करार दे रही हैं।