फॉर्म 6 पर जयराम रमेश का चुनाव आयोग पर बड़ा हमला, CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग
देश में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर चुनाव आयोग (ECI) और विपक्षी दलों के बीच तकरार गहराती जा रही है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि युवा और पहली बार वोट देने वाले नागरिकों (First-time voters) के लिए फॉर्म 6 में ऐसी शर्तें जोड़ दी गई हैं, जिससे उनका मतदाता सूची में नाम जुड़वाना कठिन हो गया है।
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट साझा करते हुए कहा कि एक तरफ तो चुनाव आयोग युवा मतदाताओं को जोड़ने के लिए विशेष एनरोलमेंट कैंप लगाने और सोशल मीडिया पर व्यापक प्रचार करने का दिखावा कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ ‘फॉर्म 6’ के ऑनलाइन वर्जन में SIR से जुड़ी अतिरिक्त घोषणा (Declaration) जोड़कर युवाओं के रास्ते में बाधाएं खड़ी कर रहा है।
फॉर्म 6 में क्या जोड़ा गया, क्यों खड़ा हुआ विवाद?
गौरतलब है कि पहली बार मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म 6 का इस्तेमाल किया जाता है। जुलाई 2026 में फॉर्म के ऑनलाइन संस्करण में एक नई घोषणा जोड़ी गई, जिसमें आवेदक से पूछा गया कि क्या उसका नाम पिछली SIR की मतदाता सूची में था, या फिर उसके माता-पिता या दादा-दादी का नाम उस पुरानी सूची में दर्ज था।
कई राज्यों में पिछली SIR वर्ष 2000 के शुरुआती दशकों में कराई गई थी। ऐसे में आज 18 वर्ष की आयु पूरी कर रहे नए युवा मतदाताओं का नाम उस पुरानी सूची में होना संभव ही नहीं है, क्योंकि उस दौरान उनका जन्म भी नहीं हुआ था। इसके चलते फॉर्म में माता-पिता या दादा-दादी की पुरानी जानकारी देना अनिवार्य जैसा हो गया।
रिपोर्ट्स के अनुसार, ऑनलाइन पोर्टल पर हालांकि इस घोषणा को वैकल्पिक (Non-mandatory) दिखाया गया था, लेकिन व्यावहारिक रूप से इस विकल्प को भरे बिना आवेदक फॉर्म आगे सबमिट नहीं कर पा रहे थे। बताया जा रहा है कि इस प्रक्रियात्मक खामी को लेकर चुनाव आयोग के दो सदस्यों ने भी आंतरिक रूप से आपत्ति दर्ज कराई थी।
जयराम रमेश के गंभीर आरोप: ‘Gen Z के साथ हुआ धोखा’
जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि फॉर्म 6 में इस प्रकार की शर्तें जोड़ने का चुनाव आयोग के पास कोई स्वतंत्र कानूनी अधिकार नहीं था। उनके अनुसार, मतदाता पंजीकरण नियम (1960) में किसी भी प्रकार का बदलाव करने के लिए तय कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाना अनिवार्य था, जिसे दरकिनार कर दिया गया।
कांग्रेस नेता ने कहा कि इस मनमाने कदम से पहली बार वोट देने वाले देश के ‘Gen Z’ युवाओं के सामने अनावश्यक परेशानी खड़ी हुई। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर संवैधानिक मर्यादाओं और कानूनी नियमों की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए उनके इस्तीफे और जवाबदेही तय करने की मांग की। इसके साथ ही उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से इस पूरे मामले पर स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लेने की अपील की। रमेश ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के उस बयान का भी उल्लेख किया, जिसमें ज्ञानेश कुमार से पद से इस्तीफा देने और मामले में सरकारी गवाह बनने की बात कही गई थी।
चुनाव आयोग की सफाई: मूल फॉर्म में कोई बदलाव नहीं
विपक्ष के इन तीखे आरोपों पर चुनाव आयोग ने अपना पक्ष रखते हुए स्पष्ट किया है कि मूल फॉर्म 6 के कानूनी प्रारूप में कोई बदलाव नहीं किया गया है। आयोग के अनुसार, SIR से जुड़े डेटा संकलन के लिए फॉर्म 6 के साथ अलग से एक अतिरिक्त घोषणा यानी एनेक्सचर डी (Annexure D) जोड़ा गया है।
चुनाव आयोग ने बताया कि यह कदम 24 जून 2025 को जारी किए गए SIR संबंधी पूर्व निर्देशों के तहत उठाया गया था, जिसमें नए मतदाताओं द्वारा फॉर्म 6 या फॉर्म 8 भरने के साथ अतिरिक्त घोषणा पत्र जमा करने की बात कही गई थी। आयोग का कहना है कि यह केवल चुनावी प्रक्रिया की शुचिता और सत्यापन को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से किया गया प्रशासनिक कदम है।
