‘हमने फॉर्म 6 में बदलाव को मंजूरी नहीं दी’, सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद CEC ज्ञानेश कुमार पर विपक्ष का तीखा हमला
मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दाखिल एक याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की एक अहम टिप्पणी ने नए सिरे से सियासी बवाल खड़ा कर दिया है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि ‘कोर्ट ने फॉर्म 6 में किसी बदलाव को मंजूरी नहीं दी है’।
इस टिप्पणी के बाद कांग्रेस से लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) जैसे विपक्षी दलों ने सीईसी ज्ञानेश कुमार पर देश की जनता से झूठ बोलने और चुनाव आयोग की शक्तियों के दुरुपयोग का आरोप लगाया है।
‘CEC ने झूठ बोला, Gen Z वोटरों को रोकना था मकसद’: कांग्रेस
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “यह साफ और स्पष्ट है कि सीईसी ने झूठ बोला। सीईसी ने खुद जानबूझकर फॉर्म 6 में बदलाव किया ताकि जेन Z (Gen Z) वोटरों के नाम हटाए जा सकें, जिनसे प्रधानमंत्री बुरी तरह डरे हुए हैं।”
सीजेपी का आरोप: ECI की प्रेस रिलीज और कोर्ट के बयान में विरोधाभास
CJP के संस्थापक सदस्य सौरव दास ने चुनाव आयोग की 26 सितंबर की प्रेस रिलीज का हवाला देते हुए गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा, “‘इंडियन एक्सप्रेस’ में मामले का खुलासा होने के ठीक एक दिन बाद, 26 सितंबर को चुनाव आयोग की प्रेस रिलीज़ में दावा किया गया था कि ‘SIR के लिए फॉर्म 6 के साथ लगे डिक्लेरेशन को SC ने सही ठहराया है’। लेकिन आज CJI सूर्यकांत ने इससे इनकार कर दिया है।”
सौरव दास ने कहा कि कोर्ट ने CEC की कार्रवाई से खुद को अलग कर लिया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि बाकी दो चुनाव आयुक्तों ने फॉर्म 6 में किए गए बदलाव पर आपत्ति जताई थी।
आशुतोष रांका ने इस बात पर जोर दिया कि चुनाव आयोग की 26 सितंबर की वह प्रेस रिलीज अब ECI की आधिकारिक वेबसाइट से गायब है। उन्होंने सवाल उठाया, “क्या CEC ने देश की जनता से आधिकारिक तौर पर झूठ बोला है?” वहीं, सीजेपी के संयोजक अभिजीत दीपके ने भी सीईसी की कार्रवाई को ‘गैर-कानूनी’ बताते हुए जवाबदेही तय करने की मांग की।
क्या है फॉर्म 6 विवाद?
याचिकाकर्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी की ओर से पेश वकील मेनका गुरुस्वामी ने कोर्ट को बताया कि नए वोटरों को जोड़ने वाले ‘फॉर्म 6’ में बदलाव किया गया है। इस पर सीजेआई ने नोटिस जारी करते हुए कहा, “फॉर्म 6 में बदलाव को कोर्ट ने मंजूरी नहीं दी है। रिकॉर्ड सामने आने पर देखा जाएगा कि यह बदलाव किसने किया?”
फॉर्म 6 और डिक्लेरेशन को लेकर चुनाव आयोग का पक्ष
फॉर्म 6 का इस्तेमाल वोटर लिस्ट में नया नाम जुड़वाने के लिए किया जाता है। विपक्षी दलों का दावा है कि ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) के दौरान इस फॉर्म में बदलाव किया गया, जिसके तहत नए वोटर्स को अपने, माता-पिता या दादा-दादी के पुराने SIR रिकॉर्ड से संबंध बताना अनिवार्य किया गया था।
हालांकि, चुनाव आयोग (ECI) ने पहले इस पर सफाई देते हुए कहा था कि ‘फॉर्म 6’ में कोई मूल बदलाव नहीं किया गया है, बल्कि इसके साथ केवल एक ‘डिक्लेरेशन फॉर्म’ जोड़ा गया है। आयोग का कहना था कि यह डिक्लेरेशन केवल SIR प्रक्रिया तक ही सीमित है, जिसके खत्म होने के बाद फॉर्म 6 पहले की तरह ही भरा जा सकेगा।
