September 15, 2026

सत्य निकेतन में G+1 की इजाजत, बन गई 5 मंजिल; 7 मौतों के बाद MCD पर उठे सवाल

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दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस स्थित सत्य निकेतन इलाके में एक पांच मंजिला इमारत ढहने से सात लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। मरने वालों में पांच डीयू के छात्र बताए जा रहे हैं। दशकों पुरानी इस इमारत में लड़कों का पीजी चल रहा था। रविवार (6 सितंबर) को हुए इस हादसे के बाद दिल्ली नगर निगम (MCD) ने सख्त कदम उठाते हुए सोमवार को दक्षिण क्षेत्र के उपायुक्त राकेश कुमार और चार इंजीनियरों को अनुशासनात्मक कार्रवाई पूरी होने तक के लिए सस्पेंड कर दिया है।

सिर्फ ‘ग्राउंड प्लस वन’ की थी इजाजत, बन गई 5 मंजिल सत्य निकेतन का यह इलाका 1970 के दशक में पुनर्वास कॉलोनी के रूप में विकसित किया गया था। नियमों के मुताबिक, यहां 55 वर्ग गज के छोटे भूखंडों पर सिर्फ ग्राउंड और एक मंजिल (ग्राउंड प्लस वन) बनाने की अनुमति थी। MCD के अनुसार, यह इमारत 1990 के दशक में बनी थी और इसका कोई स्वीकृत नक्शा नहीं था। हालांकि, स्थानीय निवासियों का दावा है कि ढांचा 50 साल पुराना था। निगम के रिकॉर्ड के मुताबिक, इमारत के मालिक ने पिछले साल प्रॉपर्टी टैक्स और 2007 में कन्वर्जन शुल्क जमा किया था, लेकिन इसके अवैध निर्माण को लेकर MCD को कभी कोई शिकायत नहीं मिली।

बेसमेंट में काम या पानी का जमाव? स्थानीय लोगों ने इमारत ढहने के पीछे बेसमेंट में जमा पानी और वहां चल रहे मरम्मत कार्य को जिम्मेदार ठहराया है। MCD कमिश्नर संजीव खिरवार ने स्पष्ट किया कि बेसमेंट में वास्तव में कोई काम हो रहा था या नहीं, इसका पता मजिस्ट्रेट जांच के बाद ही चल सकेगा। फिलहाल एहतियात के तौर पर निगम ने पास की एक इमारत, जिसमें लड़कियों का पीजी था, उसे खाली कराकर सील कर दिया है। इसके अलावा आसपास की कम से कम चार इमारतों को MCD अधिनियम, 1957 की धारा 349 के तहत खतरनाक मानते हुए खाली करने का नोटिस जारी किया गया है।

MCD के मानसून सर्वे पर उठे सवाल इस हादसे ने MCD के उस प्री-मानसून सर्वे की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसमें जून 2026 में करीब 27.84 लाख इमारतों की जांच की गई थी। इस विशाल सर्वे में निगम को पूरी दिल्ली में केवल 19 इमारतें ‘खतरनाक’ मिली थीं। अधिकारियों ने माना कि सर्वे के दौरान टीम सिर्फ बाहर से दरारें या झुकी हुई दीवारें देखती है, इमारत की कोई विस्तृत स्ट्रक्चरल जांच नहीं की जाती। इसके बावजूद, निगम का दावा है कि जून से सितंबर के बीच उसने 980 संपत्तियों पर तोड़फोड़ की, 460 को सील किया और अवैध निर्माण के खिलाफ 1,500 से ज्यादा कारण बताओ नोटिस जारी किए।

बीजेपी का आरोप- पुरानी दिल्ली में भी बन रहीं अवैध इमारतें हादसे के बाद राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी शुरू हो गए हैं। बीजेपी नेता विजय गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि पुरानी दिल्ली और चांदनी चौक में आज भी खुलेआम छह मंजिल तक के अवैध निर्माण हो रहे हैं। उन्होंने जर्जर इमारतों को बड़े हादसों का निमंत्रण बताते हुए आरोप लगाया कि MCD सालों से चली आ रही इस समस्या से निपटने में पूरी तरह विफल रही है।

साउथ दिल्ली में इस साल हुए कई बड़े हादसे सत्य निकेतन की घटना दिल्ली में इमारतों से जुड़े हादसों की कड़ी का नया मामला है। इस साल खासकर दक्षिण क्षेत्र में ऐसी कई घटनाएं सामने आई हैं। इससे पहले 30 मई को सैदुल अजायब में इमारत गिरने से छह लोगों की जान गई थी। वहीं, तीन जून को हौज रानी इलाके में एक ‘बेड एंड ब्रेकफास्ट’ में आग लगने से 11 विदेशी नागरिकों समेत 23 लोगों की मौत हुई थी। इसके अलावा जून में ही मलका गंज सब्जी मंडी इलाके और करावल नगर में भी इमारतें ढहने की घटनाएं दर्ज की गई थीं।