‘जियोपॉलिटिकल टकराव से ग्लोबल ऑर्डर पर बढ़ रहा भारी दबाव’: UNGA में एस. जयशंकर ने दी चेतावनी

S-Jaishankar

अमेरिका के दौरे पर गए विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोमवार (स्थानीय समय) को संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र के दौरान एक मजबूत और अधिक असरदार बहुपक्षीय व्यवस्था (Multilateral System) की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया। ‘पार्टनर्स फॉर मल्टीलेटरलिज़्म समिट’ (Partners for Multilateralism Summit) में बोलते हुए उन्होंने चेतावनी दी कि दुनिया में बढ़ते जियोपॉलिटिकल कॉम्पिटिशन, तनाव और टकराव की वजह से ग्लोबल ऑर्डर पर भारी दबाव पड़ रहा है।

‘संरचनात्मक बदलाव के दौर से गुजर रही दुनिया’

समिट में अपने विचार रखते हुए जयशंकर ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस समय बड़े स्ट्रक्चरल (संरचनात्मक) बदलाव के दौर से गुजर रहा है। उन्होंने कहा, “हम ऐसे समय में मिल रहे हैं जब ग्लोबल ऑर्डर दबाव में है। पिछले कुछ दशकों से दुनिया में लगातार संतुलन में बदलाव देखा जा रहा है। हालांकि, बहुत ज्यादा कॉम्पिटिशन, जियोपॉलिटिकल तनाव और असल टकराव ने इसे पूरी तरह से अलग रूप दे दिया है।”

जयशंकर ने स्पष्ट किया कि ऐसे तनावपूर्ण माहौल में देशों को अपने मतभेदों को गहरा करने के बजाय आपसी सहयोग को मजबूत करने की दिशा में काम करना चाहिए।

अंतरराष्ट्रीय सहयोग के कमजोर होने का खतरा

विदेश मंत्री ने चेताया कि भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के तेजी से बढ़ने के परिणाम केवल देशों के आपसी रिश्तों तक सीमित नहीं रहेंगे।

उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, “अगर इन प्रवृत्तियों को बिना रोक-टोक जारी रहने दिया गया, तो यह अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के जरिए देशों के मिलकर काम करने के बुनियादी सिद्धांत को कमजोर कर देगा। यह अंतरराष्ट्रीय सहयोग की मूल भावना पर ही सवालिया निशान लगा देगा। इसीलिए यह बहुत जरूरी है कि इस मोड़ पर बहुपक्षवाद मजबूती से अपनी भूमिका निभाए।”

‘शांति से लेकर सप्लाई-चेन तक, सब सहयोग पर निर्भर’

जयशंकर ने कहा कि बहुपक्षीय सहयोग केवल बयानों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध दुनिया की सबसे अहम और वास्तविक चुनौतियों से है। उन्होंने कहा, “शांति और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और जलवायु न्याय, नई तकनीकें और विकास के लिए फंडिंग, आतंकवाद का मुकाबला, सप्लाई-चेन की मजबूती और भविष्य की महामारियों की तैयारी—ये सभी चीजें दुनिया के देशों की सहयोग की इच्छाशक्ति पर निर्भर करती हैं।”

‘4-F संकट’ पर तत्काल ध्यान देने की जरूरत

टकरावों के बीच व्यावहारिक और त्वरित समाधानों पर जोर देते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि देशों को वैश्विक व्यवधानों से पैदा हुई समस्याओं को हल करने के लिए किसी व्यापक समझौते का इंतजार नहीं करना चाहिए।

उन्होंने विशेष रूप से ईंधन (Fuel), भोजन (Food), उर्वरक (Fertilizers) और वित्त (Finance) से जुड़ी चुनौतियों की ओर इशारा किया। जयशंकर ने कहा, “इन ‘4-F संकट’ को ऐसे ही नहीं छोड़ा जा सकता, इन पर तत्काल ध्यान देने की सख्त जरूरत है। व्यापक शांति के प्रयास करते हुए भी विशिष्ट पहलुओं को संबोधित किया जाना चाहिए।”

विदेश मंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत लगातार वैश्विक संस्थाओं (जैसे UNSC) में सुधार और अंतरराष्ट्रीय फैसला लेने की प्रक्रिया को ज्यादा प्रतिनिधित्व वाला बनाने पर जोर दे रहा है। 2026 में भारत की ब्रिक्स (BRICS) अध्यक्षता के दौरान भी नेताओं ने सुधारे गए बहुपक्षीय सिस्टम की जरूरत का मजबूती से समर्थन किया था।