NIA का बड़ा प्रहार: लश्कर आतंकियों के मददगारों की तलाश में 10 ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने सीमा पार आतंकवाद और घुसपैठियों की मदद करने वाले नेटवर्क के खिलाफ जम्मू-कश्मीर में बड़ी कार्रवाई की है। शनिवार को जांच एजेंसी की टीमों ने कुपवाड़ा, कुलगाम, बांदीपोरा, बारामूला और सोपोर में एक साथ 10 अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई मुख्य रूप से पाकिस्तान में बैठे लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के आतंकियों और घाटी में सक्रिय उनके स्थानीय मददगारों (OGWs) के गठजोड़ को ध्वस्त करने के लिए की गई है।
घुसपैठियों को लॉजिस्टिक सपोर्ट देने का शक
NIA की जांच में सामने आया है कि पाकिस्तान में बैठे लश्कर के हैंडलर स्थानीय नेटवर्क के जरिए घुसपैठ कर सीमा पार से आने वाले आतंकियों की मदद कर रहे थे। जांच एजेंसी के मुताबिक, स्थानीय ओवर ग्राउंड वर्कर्स (OGWs) पर आतंकियों को छिपने के लिए सुरक्षित ठिकाने देने, आवाजाही में मदद करने, सुरक्षाबलों के मूवमेंट की रेकी करने और अन्य लॉजिस्टिक सपोर्ट मुहैया कराने का शक है। इसी नेटवर्क की कार्यप्रणाली को समझने के लिए एजेंसी यह पड़ताल कर रही है कि इन आतंकियों तक हथियार और विस्फोटक किस तरह पहुंचाए गए।
मार्च में पकड़े गए OGW से खुले थे राज
इस पूरे टेरर मॉड्यूल की जांच इस साल 31 मार्च की देर रात हुई एक गिरफ्तारी के बाद शुरू हुई थी। सुरक्षाबलों ने एक नाके पर चेकिंग के दौरान लश्कर से जुड़े एक कथित OGW को गिरफ्तार किया था, जिसके पास से हैंड ग्रेनेड और जिंदा कारतूस बरामद हुए थे। इस गिरफ्तारी के बाद जब जांच का दायरा बढ़ा, तो साजिश से जुड़े कुछ पाकिस्तानी नागरिकों को भी पकड़ा गया। इनसे हुई पूछताछ के आधार पर ही स्थानीय स्तर पर आतंकियों को पनाह देने वाले लोगों की पहचान उजागर हुई।
टेरर फंडिंग और संचार के तरीकों की जांच तेज
शनिवार को हुई छापेमारी के दौरान NIA की टीमों ने कई आपत्तिजनक दस्तावेज और संदिग्ध सामग्री जब्त की है। जांच एजेंसी अब इस पूरे नेटवर्क की आर्थिक गतिविधियों और आतंकियों के बीच संचार के तरीकों को डिकोड करने में जुटी है। एजेंसी की ओर से स्पष्ट किया गया है कि जब्त किए गए नए दस्तावेजों का मिलान पहले से जुटाए गए सबूतों के साथ किया जा रहा है। साजिश में शामिल लोगों की भूमिका तय होने के बाद इस मामले में जल्द ही कुछ और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं।
