सास ने बहू के लिए 5 दिन में ढूंढा दूल्हा, फिर जो हुआ उसने सबको इमोशनल कर दिया

Muzaffarnagar News

Source: AI Genrated Image

Muzaffarnagar News: मुजफ्फरनगर के खतौली में एक परिवार ने दुख की घड़ी में भी इंसानियत और रिश्तों की खूबसूरत मिसाल पेश की है। बेटे की मौत के बाद सास ने अपनी बहू को बेटी का दर्जा दिया और पूरे रीति-रिवाज के साथ उसकी दूसरी शादी कराई। आर्य समाज मंदिर में शादी हुई, जहां देवर ने भाई बनकर कन्यादान किया और सास ने आंखों में आंसू लिए बेटी की तरह विदा किया।

10 साल पहले हुई थी रोहित से शादी
हरिद्वार के बहादुरपुर की रहने वाली मीनाक्षी की शादी करीब 10 साल पहले दयालपुरम निवासी रोहित से हुई थी। शादी के बाद दोनों की दो बेटियां हुईं। परिवार खुशी से चल रहा था, लेकिन फिर अचानक मुश्किलों का दौर शुरू हो गया।

पिता की मौत के अगले दिन बेटा भी नहीं रहा
रोहित के पिता ओमपाल कैंसर से पीड़ित थे। घरवाले उनका इलाज करा रहे थे, लेकिन 14 अगस्त को उनका निधन हो गया। पिता की मौत का सदमा रोहित सहन नहीं कर सका और अगले ही दिन, 15 अगस्त को उसकी भी मौत हो गई। नतीजतन, पूरा परिवार टूट गया।

बहू को लेकर सास की चिंता बढ़ी
पति के जाने के बाद मीनाक्षी की जिंदगी को लेकर उसकी सास सुनीता लगातार चिंतित रहने लगीं। उन्होंने तय किया कि बहू को अकेले नहीं रहने देंगी, बल्कि उसे नया जीवन शुरू करने का मौका देंगी। सुनीता ने अपने छोटे बेटे मोहित से मीनाक्षी के लिए अच्छा रिश्ता ढूंढने को कहा।

देवर ने भाभी का किया कन्यादान
कुछ समय बाद राजस्थान के नारायणपुर निवासी योगेश के साथ मीनाक्षी का रिश्ता तय हुआ। बुधवार को योगेश कुछ रिश्तेदारों के साथ शादी के लिए पहुंचा। आर्य समाज मंदिर में दोनों ने विवाह की रस्में पूरी कीं। इस दौरान मोहित ने भाभी को बहन मानते हुए कन्यादान किया।

बेटी की तरह बहू की विदाई
विदाई का वक्त बेहद भावुक था। सुनीता ने बहू नहीं, बल्कि बेटी समझकर मीनाक्षी को नए जीवन के लिए आशीर्वाद दिया। परिवार और रिश्तेदारों की मौजूदगी में शादी की सभी रस्में पूरी हुईं। इस फैसले की आसपास के लोगों ने भी काफी तारीफ की।

दोनों बेटियों को लेकर परिवार ने मिलकर लिया फैसला
मीनाक्षी की दो बेटियां हैं। परिवार की सहमति से बड़ी बेटी, सात साल की रीतू, दादी सुनीता के पास रहेगी। वहीं छोटी बेटी अविका अपनी मां मीनाक्षी के साथ नए घर जाएगी। बताया गया कि यह फैसला मीनाक्षी की रजामंदी से लिया गया है।

छोटी बेटी अपनी मां के साथ
सुनीता का कहना है कि बड़ी पोती उनके पास रहेगी तो मीनाक्षी का इस घर में आना-जाना बना रहेगा। उन्होंने कहा कि बहू को बेटी की तरह विदा जरूर किया है, लेकिन रिश्ता कभी खत्म नहीं होगा।

पति की मौत के बाद परेशान रहने लगी थी मीनाक्षी
सुनीता के मुताबिक, पति के निधन के बाद मीनाक्षी काफी परेशान रहने लगी थी। करवाचौथ का त्योहार नजदीक था, जिसे सोचकर वह और भावुक हो जाती थी। इसी वजह से सुनीता ने जल्दी से उसके लिए नया रिश्ता तलाशना शुरू किया। महज पांच दिनों में रिश्ता तय हुआ और शादी भी करा दी गई।

हालांकि, मीनाक्षी के मायके से कोई भी शादी में शामिल नहीं हुआ। इसके बावजूद ससुराल वालों ने उसे बेटी मानकर सम्मान और प्यार के साथ नई जिंदगी की ओर विदा किया।