भागवत का बड़ा बयान: ‘भारत में मुस्लिम न रहें, ऐसा सोचने वाला हिंदू नहीं’
न्यूयॉर्क: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने अमेरिका के न्यूयॉर्क में आयोजित ‘वन वर्ल्ड, वन ह्यूमैनिटी कॉन्फ्रेंस’ में हिंदुत्व और समावेशी समाज को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हिंदुत्व किसी को बाहर रखने वाली विचारधारा नहीं है और संघ बिना किसी भेदभाव के सभी को साथ लेकर चलने में विश्वास रखता है।
हिंदुत्व और मुस्लिमों पर बेबाक राय
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भागवत ने स्पष्ट कहा कि अगर कोई हिंदू यह मानता है कि भारत में कोई मुसलमान नहीं होना चाहिए, तो वह हिंदू नहीं रह सकता।
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उन्होंने संघ के अल्पसंख्यकों के विरोधी होने की धारणा को पूरी तरह से खारिज किया और इसे सेवा व संवाद का संगठन बताया।
1996 के चरखी दादरी विमान हादसे का उदाहरण
आरएसएस की सेवा भावना को स्पष्ट करने के लिए मोहन भागवत ने 12 नवंबर 1996 को हरियाणा के चरखी दादरी में हुए भीषण मिड-एयर कोलिजन (विमानों की टक्कर) का जिक्र किया।
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इस हादसे में सऊदी अरब एयरलाइंस और कजाकिस्तान एयरलाइंस के विमान हवा में टकरा गए थे, जिनमें ज्यादातर यात्री अरब देशों के मुसलमान थे।
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भागवत ने बताया कि दुर्घटना स्थल पर सबसे पहले पहुंचने वाले लोग RSS के स्वयंसेवक ही थे।
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स्वयंसेवकों ने यह नहीं देखा कि वे किसकी सेवा कर रहे हैं। उन्होंने बिना धर्म देखे शवों को निकाला, अंतिम संस्कार का इंतजाम किया और परिवारों को मृतकों की पहचान करने में मदद की।
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उन्होंने कहा, “हमने यह नहीं सोचा कि वे मुसलमान हैं। हम ऐसा इसलिए कर पाए क्योंकि हम राजनीति में नहीं हैं।”
‘राजनीति अब सिर्फ अपने फायदे का खेल’
वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य पर प्रहार करते हुए आरएसएस प्रमुख ने कहा कि राजनीति अब केवल अपने फायदे का खेल बन गई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जहां ‘मैं और मेरा’ की भावना हावी होती है, वहां कभी कोई समाधान नहीं निकलता। वास्तविक समाधान हमेशा ‘हम और हमारा’ की भावना से ही आता है। इसी सोच के साथ संघ ने समाज से शुरुआत की है।
अल्पसंख्यकों के साथ संवाद की पहल
भागवत ने जानकारी दी कि आरएसएस ने साल 2018 के बाद से भारत में ईसाई और मुस्लिम समुदायों के साथ बातचीत का सिलसिला शुरू किया है। उनके मुताबिक, किसी भी समस्या के समाधान के लिए संवाद पहला कदम है और सेवा दूसरा। संघ इसी दिशा में धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है और हर जगह समान रूप से सेवा कार्य कर रहा है।
