September 15, 2026

भागवत के बयान पर इकबाल अंसारी की हामी, ‘हिंदुस्तान भाईचारे की धरती’

Iqbal Ansari

अयोध्या: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत द्वारा अमेरिका में हिंदू-मुस्लिम एकता और समावेशी समाज को लेकर दिए गए बयान पर बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि मामले के पूर्व पक्षकार इकबाल अंसारी की सकारात्मक प्रतिक्रिया सामने आई है। इकबाल अंसारी ने संघ प्रमुख की बातों का खुलकर समर्थन करते हुए कहा कि हिंदुस्तान हमेशा से हिंदू और मुसलमानों के बीच आपसी स्नेह और भाईचारे की धरती रहा है।

‘देश को प्रगति, विकास और रोजगार पर ध्यान देना चाहिए’

इकबाल अंसारी ने कहा कि देश को अब आगे बढ़ना चाहिए और सभी नागरिकों को देश की भलाई के लिए मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज का मुख्य ध्यान राष्ट्रीय प्रगति, विकास और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने पर होना चाहिए।

संघ प्रमुख के अनुभव की सराहना करते हुए इकबाल अंसारी ने कहा, “मोहन भागवत ने जो कहा है, वह बिल्कुल सही है। वे दुनिया भर में घूमने और चीजों को गहराई से देखने-समझने के अपने व्यापक अनुभव के आधार पर बात करते हैं। उनका यह बयान भाईचारे की मिसाल पेश करता है और यह दर्शाता है कि आज देश को किस तरह के नेतृत्व की आवश्यकता है—एक ऐसा नेता जो सबका ख्याल रखे, हिंदुओं और मुसलमानों के बीच एकता को बढ़ावा दे और देश के विकास को गति दे।”

मोहन भागवत ने क्या कहा था?

अमेरिका के न्यूयॉर्क में आयोजित ‘एक दुनिया, एक मानवता’ (One World, One Humanity) सम्मेलन के दौरान मोहन भागवत ने हिंदू-मुस्लिम एकता पर बड़ा बयान दिया था।

  • भागवत ने कहा था कि अगर कोई व्यक्ति यह मानता है कि भारत में मुसलमान नहीं होने चाहिए, तो वह व्यक्ति खुद को ‘हिंदू’ कहलाने का हकदार नहीं है।

  • उन्होंने स्पष्ट किया कि हिंदू होने की पहली शर्त यह स्वीकार करना है कि सभी धर्मों के रास्ते अंततः एक ही ईश्वर की ओर जाते हैं।

  • संघ प्रमुख ने कहा कि इंसानों के बीच किसी भी तरह का भेदभाव नहीं हो सकता और हर व्यक्ति का सम्मान करना ही सच्ची मानवता का आधार है।

  • उन्होंने यह भी जोड़ा कि दुनिया में कई धर्म हैं और रीति-रिवाजों का अनुशासन किसी भी धार्मिक मार्ग पर चलने और ईश्वर तक पहुंचने के लिए जरूरी होता है।