Marco Rubio Statement: दुनिया के बड़े विवाद नहीं सुलझा पा रहा मौजूदा सिस्टम

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संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र के दौरान अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो (Marco Rubio) ने मौजूदा वैश्विक व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल उठाए हैं। न्यूयॉर्क में पत्रकारों से बातचीत करते हुए रुबियो ने कहा कि दुनिया में बड़े और गंभीर विवादों को सुलझाने के लिए मौजूदा अंतरराष्ट्रीय सिस्टम प्रभावी तरीके से काम नहीं कर रहा है।

‘मौजूदा सिस्टम अपनी क्षमता के मुताबिक काम नहीं कर रहा’

मार्को रुबियो ने कहा कि अमेरिका अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की उपयोगिता को अच्छी तरह समझता है और संयुक्त राष्ट्र (UN) के पास काम करने की असीम संभावनाएं हैं, लेकिन इसके बावजूद यह व्यवस्था अपनी पूरी क्षमता के मुताबिक परिणाम देने में विफल रही है।

उन्होंने कहा कि UNGA के दौरान कई अन्य वैश्विक नेताओं ने भी अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की मौजूदा स्थिति पर गहरी चिंता जताई है। रुबियो के मुताबिक, यह व्यवस्था अब अपने मूल उद्देश्यों और तय अधिकार क्षेत्र से काफी आगे निकल चुकी है और दुनिया भर में चल रहे बड़े संघर्षों से प्रभावी ढंग से निपटने में असमर्थ साबित हो रही है।

थाईलैंड-कंबोडिया और भारत-पाकिस्तान संघर्ष का जिक्र

अपनी बात को स्पष्ट करते हुए अमेरिकी विदेश मंत्री ने उदाहरण दिया कि अगर कोई वास्तव में प्रभावी अंतरराष्ट्रीय सिस्टम होता, तो वह थाईलैंड और कंबोडिया के बीच के संघर्ष, भारत और पाकिस्तान के बीच संभावित टकराव और अन्य बड़े अंतरराष्ट्रीय संकटों को रोकने या सुलझाने में अधिक सक्रिय भूमिका निभा सकता था। फिलहाल ऐसी कोई प्रभावी व्यवस्था जमीन पर नजर नहीं आती।

‘अमेरिका के लिए राष्ट्रीय हित सबसे ऊपर’

रुबियो ने यह भी स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की आलोचना करने का कतई यह मतलब नहीं है कि अमेरिका इन अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से पूरी तरह अलग हो रहा है। हालांकि, उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि जब ऐसी वैश्विक व्यवस्थाएं प्रभावी तरीके से काम करना बंद कर देती हैं, तब देश अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर स्वतंत्र फैसले लेते हैं।

उन्होंने जोर देकर कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में अमेरिका अपनी विदेश नीति में ‘राष्ट्रीय हित’ को अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के हितों से हमेशा ऊपर रखेगा। यह टिप्पणी ट्रंप प्रशासन की उस पुरानी नीति को दोहराती है, जिसके तहत अमेरिकी प्राथमिकताओं को सबसे पहले रखा जाता है।

भारत-पाकिस्तान संघर्ष और ट्रंप का दावा

मार्को रुबियो का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र महासभा में दावा किया है कि उन्होंने पिछले साल भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष को टालने और खत्म करवाने में अहम मध्यस्थता की थी। ट्रंप लंबे समय से 10 मई 2025 को हुए युद्धविराम का श्रेय अपनी कूटनीति को देते रहे हैं।

हालांकि, भारत का आधिकारिक रुख इस मामले में हमेशा से बिल्कुल अलग और स्पष्ट रहा है। नई दिल्ली का कहना है कि 10 मई 2025 को सैन्य कार्रवाई रोकने की सहमति दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों—विशेषकर दोनों देशों के डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस (DGMOs) के बीच सीधी बातचीत के बाद बनी थी। भारत ने किसी भी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता या बाहरी दखल के दावे को सिरे से खारिज किया है।