महुआ मोइत्रा ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ की FIR की मांग, EC पर लगाए गंभीर आरोप

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तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सांसद महुआ मोइत्रा ने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से लाखों नाम हटाए जाने के मुद्दे को लेकर चुनाव आयोग (EC) और उसके शीर्ष अधिकारियों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दिल्ली के पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन में शिकायत सौंपकर FIR दर्ज करने की मांग की है। मोइत्रा ने दावा किया है कि बंगाल में ‘वोट चोरी’ की परतें अब हर विधानसभा सीट पर खुल रही हैं।

16 लाख मतदाताओं के नाम हटाने पर उठाए सवाल

महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी बात रखते हुए चुनाव अधिकारियों पर निशाना साधा। उन्होंने अधिकारी सुब्रत गुप्ता का जिक्र करते हुए कहा कि अब वह दावा कर रहे हैं कि CEO कार्यालय की ओर से 16 लाख मतदाताओं के नाम हटाने के लिए दायर की गई अपीलों की उन्हें कोई जानकारी नहीं थी। इसके साथ ही, मोइत्रा ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव मनोज अग्रवाल से भी जवाब मांगा कि यह पूरी प्रक्रिया किसके आदेश पर की गई।

CEC के खिलाफ FIR की मांग

मोइत्रा ने अपनी पुलिस शिकायत में मांग की है कि मतदाता सूची के ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (SIR) के दौरान चुनाव आयोग के फैसलों को लेकर सामने आई मीडिया रिपोर्टों के आधार पर ज्ञानेश कुमार के खिलाफ FIR दर्ज हो। उन्होंने ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की एक हालिया रिपोर्ट का हवाला दिया। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि दो अन्य चुनाव आयुक्तों, सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में आयोग के फैसलों (नाम जोड़ने, हटाने और पंजीकरण प्रक्रिया में बदलाव) पर कम से कम 14 बार औपचारिक रूप से अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी।

‘सहयोगियों की सहमति के बिना अकेले लिए फैसले’

TMC सांसद ने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त को अपने दोनों सहयोगियों की दर्ज असहमति के बावजूद आयोग के नाम पर अकेले फैसले लेने का अधिकार नहीं है। उनका दावा है कि ज्ञानेश कुमार ने ऐसे आदेश जारी किए जिन्हें आयोग की पूर्ण मंजूरी नहीं मिली थी। मोइत्रा ने SIR प्रक्रिया में खर्च हुए सरकारी धन का जिक्र करते हुए इस पूरी प्रक्रिया में शामिल लोगों की भूमिका की जांच की मांग की है।

कानूनी छूट पर भी उठाए सवाल

महुआ मोइत्रा ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त एवं अन्य निर्वाचन आयुक्त अधिनियम, 2023 की धारा 16 के तहत मिलने वाली कानूनी छूट पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आधिकारिक कामकाज के लिए अदालतों से सिविल और क्रिमिनल कार्यवाही में छूट जरूर मिलती है, लेकिन पुलिस को FIR दर्ज करने या जांच करने से रोका नहीं जा सकता। मोइत्रा का तर्क है कि यदि CEC अपने दोनों सहयोगियों की राय दरकिनार कर अकेले फैसले लेते हैं, तो उसे आधिकारिक कार्य बताकर कानूनी संरक्षण नहीं दिया जा सकता।