September 15, 2026

DU के 77 कॉलेजों में सिर्फ 20 के पास कैंपस में छात्रावास की सुविधा

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दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) के कालेजों में छात्रों के लिए छात्रावास (Hostel) की भारी कमी का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए दिल्ली सरकार और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) को स्थिति सुधारने के लिए एक समयबद्ध और विस्तृत कार्य योजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने साफ किया है कि डीयू प्रशासन द्वारा पहले दिया गया जवाब मुख्य समस्या का समाधान करने के लिए पर्याप्त नहीं था।

हॉस्टलों की वर्तमान स्थिति और सीमित क्षमता

दिल्ली विश्वविद्यालय से संबद्ध 77 कालेजों में से केवल 20 के करीब कालेजों में ही परिसर के भीतर छात्रावास की सुविधा उपलब्ध है। इन सभी हॉस्टलों की कुल क्षमता लगभग 7,000 बिस्तरों की है, जबकि डीयू में हर साल 70 हजार से अधिक छात्र दाखिला लेते हैं। स्थिति यह है कि 57 कालेजों के पास अपना कोई छात्रावास ही नहीं है।

मिरांडा हाउस, हंसराज कालेज, हिंदू कालेज, रामजस कालेज और श्रीराम कालेज आफ कामर्स (एसआरसीसी) जैसे प्रमुख संस्थानों में हॉस्टल की सुविधा तो है, लेकिन कुल छात्रों की संख्या के मुकाबले यह ऊँट के मुँह में जीरे के समान है। परिणामस्वरुप, देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले छात्रों को मजबूरी में महंगे पेइंग गेस्ट (PG) या निजी किराए के कमरों पर निर्भर रहना पड़ता है।

NHRC की सख्ती और निर्देश

‘द नेटवर्क फार एक्सेस टू जस्टिस एंड मल्टीडिसिप्लिनरी आउटरीच फाउंडेशन’ की शिकायत के आधार पर 2025 में यह मामला मानवाधिकार आयोग के संज्ञान में आया था। आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली बेंच ने इसे छात्रों के मानवाधिकारों से जुड़ा गंभीर मुद्दा माना।

आयोग ने मुख्य सचिव और यूजीसी के अध्यक्ष को निर्देश दिया है कि वे डीयू के साथ मिलकर छात्रावासों की क्षमता बढ़ाने के लिए एक व्यापक रिपोर्ट तैयार करें। NHRC ने स्पष्ट किया है कि यह योजना केवल नए हॉस्टल बनाने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि मौजूदा बुनियादी ढांचे के विस्तार, मरम्मत और उसे आधुनिक बनाने की संभावनाओं को भी शामिल करना चाहिए।

वीसी ने कालेजों से मांगी 10 दिन के भीतर योजना

बढ़ते दबाव के बीच विश्वविद्यालय प्रशासन ने भी सक्रियता दिखाई है। कुलपति प्रोफेसर योगेश सिंह ने सभी कालेजों के प्राचार्यों के साथ बैठक कर इस विषय पर मंथन किया है। उन्होंने सभी प्राचार्यों को निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने परिसर में छात्रावास उपलब्ध कराने के लिए 10 दिनों के भीतर एक प्रस्तावित योजना तैयार करें।

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, अधिकांश कालेजों के पास पर्याप्त जमीन उपलब्ध है, लेकिन निर्माण कार्यों से जुड़े प्रशासनिक झंझटों और संभावित विवादों के कारण कॉलेज प्रबंधन इससे बचता रहा है। यदि इन प्रस्तावों पर गंभीरता से अमल किया जाए, तो डीयू परिसरों में छात्रों के लिए आवास और सुरक्षा दोनों की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित की जा सकती है।