लखनऊ में अवैध निर्माण पर सुप्रीम कोर्ट की नजर, अलीगंज-गोमतीनगर में सर्वे
राजधानी लखनऊ में अवैध निर्माण और अवैध प्लाटिंग के खिलाफ चल रही कार्रवाई अब सुप्रीम कोर्ट की सीधी निगरानी में पहुंच गई है। शीर्ष अदालत द्वारा नामित ‘एमिकस क्यूरी’ (न्याय मित्र) की छह सदस्यीय टीम ने शनिवार को आईआईटी दिल्ली के विशेषज्ञों (प्रोफेसरों) के साथ शहर के विभिन्न इलाकों में पहुंचकर अवैध निर्माणों का भौतिक सत्यापन और सर्वे किया।
अलीगंज अग्निकांड के बाद की कार्रवाई का निरीक्षण टीम ने सबसे पहले अलीगंज क्षेत्र का दौरा किया, जहां गत 22 जून को एक आवासीय भूखंड पर बने अवैध व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स में भीषण अग्निकांड हुआ था।
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इस हादसे के बाद लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया था कि अलीगंज क्षेत्र में आवासीय भूमि पर मानकों के विरुद्ध 51 व्यावसायिक निर्माण चिन्हित किए गए हैं।
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एमिकस क्यूरी की टीम ने इन भवनों पर हुई सीलिंग और ध्वस्तीकरण (Demolition) की कार्रवाई का बारीकी से जायजा लिया। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए शहर के अन्य हिस्सों में भी अवैध निर्माणों की जांच के निर्देश दिए थे।
गोमती नगर विस्तार और वेलनेस सिटी तक पहुंची जांच अलीगंज के बाद उच्चस्तरीय टीम ने गोमती नगर विस्तार के सरसवां इलाके में पुलिस मुख्यालय के पीछे गिराए गए अवैध निर्माणों का निरीक्षण किया। इसके बाद टीम ‘वेलनेस सिटी’ पहुंची, जहां एलडीए द्वारा अवैध प्लाटिंग और निर्माण के खिलाफ की गई कार्रवाई का मौके पर जाकर सत्यापन किया गया। इस पूरी निरीक्षण प्रक्रिया के दौरान एलडीए के अपर सचिव सीपी त्रिपाठी और ज्ञानेंद्र वर्मा समेत तमाम वरिष्ठ जोनल अधिकारी मौजूद रहे।
सुप्रीम कोर्ट में पेश होगी रिपोर्ट लखनऊ में अवैध निर्माणों के खिलाफ हुई कार्रवाई का यह सर्वे पूरा होने के बाद एमिकस क्यूरी की टीम अपनी विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेगी, जिसे सीधे सुप्रीम कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। यह पूरी कार्रवाई ‘लोकनाथन बनाम तमिलनाडु राज्य सरकार’ मामले की सुनवाई का हिस्सा है, जिसके तहत सुप्रीम कोर्ट देश के प्रमुख महानगरों में अनियोजित और अवैध निर्माणों के मामलों पर बेहद सख्त रुख अपनाए हुए है।
