कोलकाता के चोरबागन पूजा पंडाल में भगदड़, 19 लोगों की मौत, मची चीख-पुकार
पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में शारदीय नवरात्रि के दौरान एक बड़ा और दर्दनाक हादसा हो गया है। महासप्तमी के मौके पर चोरबागन दुर्गा पूजा पंडाल में दर्शन के दौरान अचानक भगदड़ मचने से 19 लोगों की जान चली गई। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार और बेहद खौफनाक मंजर देखने को मिला। कोई मां अपने बच्चों के लिए रोती-बिलखती नजर आई, तो कहीं बेटे अपनी मां के लिए तड़पते दिखे।
बारिश और संकरे रास्तों ने बढ़ाई मुसीबत
प्रत्यक्षदर्शियों और पीड़ितों ने मीडिया को इस भयावह हादसे का आंखों देखा हाल बयां किया है। लोगों के मुताबिक, भगदड़ मचने के पीछे भारी बारिश, पंडाल की बदइंतजामी और संकरे रास्ते मुख्य वजह रहे। अचानक हुई तेज बारिश के कारण दर्शनार्थियों के साथ-साथ आम लोगों ने भी पानी से बचने के लिए पंडाल के भीतर शरण ले ली थी। इसके चलते पंडाल के अंदर क्षमता से कहीं अधिक भीड़ जमा हो गई और लोगों को निकलने का रास्ता नहीं मिला।
सीटी और घोषणाओं से फैला पैनिक
भीड़भाड़ और घुटन भरे इस माहौल में किसी ने अचानक सीटी बजा दी और माइक पर कुछ घोषणाएं की गईं। चश्मदीदों का कहना है कि इन्हीं घोषणाओं और शोर-शराबे की वजह से वहां मौजूद लोगों के बीच कोई अफवाह फैल गई और अफरा-तफरी मच गई। लोग घबराहट में संकरे रास्तों से इधर-उधर भागने लगे। बाहर निकलने की इस जद्दोजहद में जो लोग नीचे गिरे, वे भीड़ के पैरों तले कुचले गए।
मंत्री उमेश राय ने आयोजकों को ठहराया जिम्मेदार
इस दर्दनाक घटना पर मंत्री उमेश राय ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने बताया कि पंडाल में उस वक्त सबसे ज्यादा संख्या महिलाओं और बच्चों की थी। अफवाह फैलने के कारण सबसे ज्यादा पैनिक भी उन्हीं के बीच हुआ और वे खुद को बचा नहीं सके।
मंत्री उमेश राय ने हादसे के लिए सीधे तौर पर पूजा के आयोजकों को जिम्मेदार ठहराया है। उनके मुताबिक, सीटी बजाकर और बिना सोचे-समझे घोषणाएं करके भीड़ को भड़काया गया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह भगदड़ भारी बारिश और आयोजन स्थल पर मौजूद अव्यवस्थाओं का ही सीधा परिणाम है।
