‘खरगे को 3 चिट्ठियां लिखीं, राहुल से बात की…’ परिसीमन और महिला आरक्षण पर किरेन रिजिजू ने कांग्रेस को घेरा; जानें क्या दिया आश्वासन

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महिला आरक्षण को लागू करने के लिए प्रस्तावित विधेयक और परिसीमन (Delimitation) के मुद्दे पर केंद्र सरकार और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के बीच तनातनी बढ़ती जा रही है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर 33 प्रतिशत महिला आरक्षण विधेयक को पारित कराने में बाधा डालने का आरोप लगाया है। उनका दावा है कि अन्य विपक्षी दल सरकार के साथ बातचीत कर रहे हैं, लेकिन कांग्रेस इससे पीछे हट रही है।

’10 से ज्यादा बार दिया कांग्रेस को न्योता’

हिंदुस्तान टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में रिजिजू ने कहा कि सरकार ने कांग्रेस के साथ बातचीत के लिए बार-बार प्रयास किए हैं। उन्होंने दावा किया, “कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को तीन पत्र लिखे गए और उनसे कई बार बात भी हुई। मैंने राहुल गांधी से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात कर उन्हें चर्चा के लिए आमंत्रित किया था। सरकार ने कांग्रेस को 10 से अधिक बार बातचीत के लिए बुलाया, लेकिन पार्टी की ओर से कोई सकारात्मक पहल नहीं हुई।”

रिजिजू ने सवाल उठाया कि जब समाजवादी पार्टी (SP), डीएमके, वाईएसआरसीपी, शिवसेना (UBT) और एनसीपी (शरद पवार) जैसे दल चर्चा के लिए आ सकते हैं, तो कांग्रेस क्यों नहीं? उन्होंने आरोप लगाया कि निजी बातचीत में खरगे अधिक सहमति जताने वाले दिखते हैं, लेकिन राहुल गांधी के प्रभाव में कांग्रेस का रुख कठोर बना हुआ है।

परिसीमन से राज्यों को सीटों के नुकसान का डर किया खारिज

बीजद, डीएमके और सपा सहित अन्य दलों के साथ हुई बातचीत के अनुभव साझा करते हुए रिजिजू ने बताया कि सभी की मुख्य चिंता यह है कि परिसीमन के बाद किसी राज्य की लोकसभा सीटों में आनुपातिक नुकसान नहीं होना चाहिए।

रिजिजू ने आश्वासन देते हुए कहा, “सरकार ने सभी राज्यों को भरोसा दिया है कि उनकी सीटें कम नहीं होंगी, बल्कि उन्हें अनुपात के अनुसार अतिरिक्त सीटें मिलेंगी।” विपक्ष की ओर से महिला आरक्षण को परिसीमन से अलग करने की मांग पर उन्होंने किसी विशेष प्रस्ताव पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया और कहा कि वह बातचीत की मौजूदा प्रक्रिया से संतुष्ट हैं।

सत्रावसान न होने पर दी सफाई

संसद के मानसून सत्र को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किए जाने के बावजूद औपचारिक सत्रावसान न होने पर उठ रहे सवालों पर भी रिजिजू ने स्पष्टीकरण दिया। विपक्षी नेताओं को आशंका है कि सरकार विशेष सत्र बुलाकर संविधान संशोधन या परिसीमन विधेयक पेश कर सकती है।

इस पर रिजिजू ने कहा, “संविधान में सत्रावसान की समयसीमा तय नहीं है। यदि सरकार को लगता है कि सदन की दोबारा जरूरत पड़ सकती है, तो उसे औपचारिक रूप से खुला रखा जा सकता है। यह न तो संसदीय नियमों का उल्लंघन है और न ही किसी विशेष सत्र का संकेत।”

वोट चोरी के आरोपों और मणिपुर पर भी दिया बयान

चुनावों में वोट चोरी के आरोपों और विरोध प्रदर्शनों पर रिजिजू ने कहा कि कांग्रेस बार-बार चुनावी हार से ध्यान हटाने के लिए यह मुद्दा उठा रही है। उन्होंने दावा किया कि प्रदर्शन करने वाले युवा आम छात्र नहीं, बल्कि NSUI, AAP और वामपंथी संगठनों से जुड़े कार्यकर्ता हैं।

वहीं, मणिपुर में जारी संघर्ष और अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले शांति बहाली के प्रयासों पर संसदीय कार्य मंत्री ने स्थिति को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार शांति बहाल करने के लिए सभी जरूरी प्रयास कर रही है और उम्मीद जताई कि राज्य में जल्द हालात सामान्य हो जाएंगे।