KGMU Love Jihad Case: एसटीएफ की रिपोर्ट में बड़े खुलासे, मुस्लिम फैकल्टी पर गंभीर आरोप

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लखनऊ के प्रतिष्ठित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) से जुड़े धर्मांतरण और लव जिहाद मामले में स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की जांच रिपोर्ट में बेहद गंभीर और चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, केजीएमयू के पैथोलॉजी विभाग समेत कई विंग में मुस्लिम फैकल्टी, रेजिडेंट डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ ने सुनियोजित तरीके से हिंदू महिला डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ को निशाना बनाया। आरोप है कि उनका शारीरिक और मानसिक शोषण कर उन पर धर्म परिवर्तन का दबाव डाला गया।

‘प्रेमजाल’ और ब्लैकमेलिंग का गंभीर आरोप

एसटीएफ की रिपोर्ट से पता चलता है कि केजीएमयू में बाकायदा ‘प्रेमजाल’ और ब्लैकमेलिंग का खेल चल रहा था। आरोप है कि हिंदू महिला डॉक्टरों और नर्सिंग कर्मियों को पहले अपने प्रभाव और प्रेमजाल में फंसाया गया, और फिर उनका शोषण कर धर्म परिवर्तन और निकाह के लिए मजबूर किया गया। रिपोर्ट में अलग-अलग विभागों के कई दोषियों को चिन्हित किया गया है।

अलग-अलग विभागों में सामने आए नाम:

  • पैथोलॉजी विभाग: रिपोर्ट में मुख्य आरोपी के रूप में रेजिडेंट डॉक्टर रमीजुद्दीन नायक का नाम सामने आया है। उस पर जूनियर महिला डॉक्टर का गंभीर मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न करने और जबरन धर्मांतरण का दबाव डालने का आरोप है।

  • माइक्रोबायोलॉजी विभाग: यहां शफात अली खान पर एक कंप्यूटर ऑपरेटर युवती के साथ छेड़छाड़ करने और निकाह का दबाव बनाने के आरोप लगे हैं। आरोप है कि जब युवती ने इसका विरोध किया, तो उसकी संविदा (कॉन्ट्रैक्ट) समाप्त कर उसे नौकरी से निकाल दिया गया।

  • गांधी वार्ड: नर्सिंग स्टाफ नफीस और फुरकान पर अपनी हिंदू महिला सहकर्मियों का शोषण करने और उन्हें धर्म परिवर्तन के लिए उकसाने का आरोप लगा है।

  • रेडियोलॉजी विभाग: यहां के रेजिडेंट डॉक्टर रिजवान पर अपनी एक साथी शिक्षार्थी को ब्लैकमेल करने और उसे धर्म परिवर्तन के लिए उकसाने का आरोप है।

विरोध करने पर करियर बर्बाद करने की धमकी

रिपोर्ट में सबसे गंभीर बात यह सामने आई है कि जब पीड़ित महिलाएं इस उत्पीड़न का विरोध करती थीं, तो विभागीय फैकल्टी द्वारा उनका करियर खत्म करने की धमकी दी जाती थी। एसटीएफ की जांच के मुताबिक, इतना ही नहीं, विरोध करने वाली महिलाओं को साजिश के तहत ‘मानसिक विक्षिप्त’ घोषित करने की कोशिशें भी की जाती थीं।

इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद केजीएमयू प्रशासन और स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है। अब इस मामले में आगे की कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार है।