September 15, 2026

‘सार्वजनिक जीवन में आईं तो विनाश होगा’, ग्रैंड मुफ्ती के बयान पर बवाल

Sheikh Aboobacker Ahmed,

कोच्चि: केरल के ग्रैंड मुफ्ती और कांतिपुरम एपी अबू बकर मुसलियार के नाम से मशहूर शेख अबू बकर अहमद ने महिलाओं को लेकर एक ऐसा विवादित बयान दिया है, जिससे नया सियासी और सामाजिक भूचाल आ गया है। कोच्चि में आयोजित ‘हुब्बुल रसूल सम्मेलन’ को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि महिलाओं को अपने घरों तक ही सीमित रहना चाहिए और सार्वजनिक क्षेत्र में प्रवेश नहीं करना चाहिए। उनके मुताबिक, इस्लाम ने महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा के लिए ही पर्दा प्रथा निर्धारित की है।

सोने के आभूषण से की महिलाओं की तुलना

अपने संबोधन के दौरान ग्रैंड मुफ्ती ने महिलाओं की तुलना सोने के गहनों से की और अजीबोगरीब तर्क दिया। उन्होंने कहा कि जिस तरह एक मूल्यवान सोने के हार को अलमारी और डिब्बे के अंदर सुरक्षित रखा जाता है ताकि उसकी चमक और मूल्य नष्ट न हो, ठीक उसी तरह महिलाओं को भी सुरक्षित रखना जरूरी है।

उन्होंने दुकान पर मिलने वाली साधारण पत्थर की चक्की का उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे सड़क किनारे पड़ी पत्थर की चक्कियों को कोई भी छू सकता है या उस पर पैर रख सकता है, वैसा हाल खुले में घूमने वाली महिलाओं का हो सकता है। अबू बकर ने दावा किया, “अगर हार की सुंदरता बरकरार रखनी है तो उसे डिब्बे में सुरक्षित रखना होगा। अगर महिलाओं को सार्वजनिक क्षेत्र में लाया गया, तो इससे भारी तबाही मचेगी।”

‘हमने धर्म का अध्ययन किया है, हम कहते रहेंगे’

ग्रैंड मुफ्ती ने अपने इस रुख का बचाव करते हुए कहा कि उनका उद्देश्य महिलाओं को नीचा दिखाना नहीं, बल्कि उनका सम्मान करना और उनकी रक्षा करना है। उन्होंने उन तमाम संगठनों और आलोचकों को भी करारा जवाब दिया जिन्होंने उनके इस बयान की निंदा की थी और उनके इस तरह के अधिकार पर सवाल उठाया था।

अबू बकर अहमद ने दो टूक शब्दों में कहा, “हमने धर्म का अध्ययन किया है। इसलिए, यह कहना हमारा कर्तव्य है। हम कहेंगे और कहते रहेंगे। कोई इसे रोक नहीं सकता।” उनके इस बयान के सामने आने के बाद विभिन्न महिला संगठनों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। आलोचकों का कहना है कि इस तरह की रूढ़िवादी और पितृसत्तात्मक सोच आधुनिक समाज में महिलाओं की स्वतंत्रता और समानता के अधिकारों पर सीधा प्रहार है।