1 नवंबर को रामलीला मैदान में INDIA गठबंधन का शक्ति प्रदर्शन, AAP-DMK ने बनाई दूरी
विपक्षी दलों का INDIA गठबंधन 1 नवंबर, 2026 को नई दिल्ली के रामलीला मैदान में एक बड़ा विरोध प्रदर्शन आयोजित करने जा रहा है। इस महारैली का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित अनियमितताओं को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करना है। यह कार्यक्रम मतदाता सूची में कथित हेरफेर और लोकतांत्रिक अधिकारों पर पैदा हुए खतरों के खिलाफ विपक्ष के अभियान का एक बड़ा हिस्सा है।
ये अहम दल नहीं होंगे रैली का हिस्सा
इस महत्वपूर्ण रैली से कई प्रमुख दलों ने किनारा कर लिया है। जानकारी के मुताबिक, आम आदमी पार्टी (AAP), DMK, AIMIM और BJD इस रैली में भाग नहीं लेंगे। दिल्ली चुनाव के बाद राजनीतिक समीकरणों में आए बदलाव के कारण AAP ने कांग्रेस से दूरी बना ली है, क्योंकि पंजाब में उसका मुख्य मुकाबला कांग्रेस और अकाली दल से ही है।
वहीं, DMK ने TVK पार्टी के राजनीतिक उभार के कारण कांग्रेस से दूरी बनाई है। दूसरी तरफ, TVK के रैली में शामिल होने पर अभी भी सस्पेंस बरकरार है। नई सरकार होने के कारण TVK फिलहाल केंद्र सरकार के साथ सीधे टकराव से बचना चाहती है।
विपक्षी दलों का चुनाव आयोग पर क्या है आरोप?
इस रैली के केंद्र में चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया है। विपक्षी दलों का आरोप है कि पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से गलत तरीके से हटाए गए हैं। इसके अलावा, वेरिफिकेशन प्रक्रियाओं और तकनीक के इस्तेमाल में भी गड़बड़ी का आरोप लगाया गया है। विपक्ष का कड़ा ऐतराज है कि चुनाव आयोग ने मतदाता सूची में हुई इन गड़बड़ियों से जुड़ी शिकायतों पर उचित संज्ञान नहीं लिया और कोई कार्रवाई नहीं की।
रैली में कौन-कौन नेता होंगे शामिल?
INDIA गठबंधन में शामिल कई प्रमुख दलों के नेताओं ने इस रैली में अपनी उपस्थिति और समर्थन की पुष्टि की है:
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कांग्रेस: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा।
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TMC (तृणमूल कांग्रेस): ममता बनर्जी के प्रतिनिधि के तौर पर डेरेक ओ’ब्रायन।
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सपा (समाजवादी पार्टी): पार्टी के वरिष्ठ प्रतिनिधि।
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RJD (राष्ट्रीय जनता दल): तेजस्वी यादव या उनके प्रतिनिधि।
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JMM (झारखंड मुक्ति मोर्चा): झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन।
1 नवंबर का यह कार्यक्रम केवल राजनीतिक दलों तक ही सीमित नहीं रखा गया है। आयोजकों ने छात्र संगठनों, युवा समूहों, नागरिक समाज संगठनों (NGOs), पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को भी इसमें शामिल होने का न्योता दिया है।
बीजेपी और चुनाव आयोग का रुख
दूसरी तरफ, सत्ताधारी भाजपा और उसके सहयोगियों ने विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए रैली की टाइमिंग पर सवाल उठाए हैं। वहीं, चुनाव आयोग का स्पष्ट कहना है कि उसके सभी फैसलों को संवैधानिक और कानूनी आधार प्राप्त है।
