हामिद अंसारी के ‘हिंदू दक्षिणपंथी’ वाले बयान पर भड़की BJP, पूछा- क्या राहुल गांधी से ले रहे हैं कोचिंग?
पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी द्वारा ‘हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता’ को लेकर दिए गए हालिया बयान पर नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने उनके इस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। यूपी भाजपा के मुख्य प्रवक्ता दिनेश प्रताप सिंह ने अंसारी पर सीधा निशाना साधते हुए कांग्रेस पार्टी से भी इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करने की मांग की है।
‘देश को ऐसे बयानों से है असली खतरा’
बीजेपी प्रवक्ता दिनेश प्रताप सिंह ने हामिद अंसारी के बयान को खारिज करते हुए कहा कि भारत को हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता से नहीं, बल्कि इस तरह के भड़काऊ और नकारात्मक बयानों से खतरा है।
सिंह ने पूर्व उपराष्ट्रपति के पुराने बयानों का भी हवाला दिया। उन्होंने कहा, “जब भी हामिद अंसारी बोलते हैं, वह देश के बारे में नकारात्मक बातें ही करते हैं। वह पहले भी भारत में मुसलमानों के असुरक्षित होने का दावा कर चुके हैं। वह आज भी इसी देश में रह रहे हैं, ऐसे में एक पूर्व संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को देश की स्थिति पर इस तरह की बयानबाजी शोभा नहीं देती।”
‘क्या राहुल गांधी से कोचिंग ले रहे हैं अंसारी?’
भाजपा प्रवक्ता ने इस विवाद में मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस को भी लपेट लिया। उन्होंने कांग्रेस से सवाल किया कि वह हामिद अंसारी के इस बयान से कितनी सहमत है? राहुल गांधी पर तंज कसते हुए सिंह ने कहा, “ऐसा लगता है कि हामिद अंसारी अब राहुल गांधी से ‘कोचिंग’ ले रहे हैं। उन्हें स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर उन्हें देश में किस तरह का खतरा दिखाई दे रहा है।”
आखिर हामिद अंसारी ने क्या कहा था?
यह पूरा विवाद हामिद अंसारी के 18 सितंबर को नई दिल्ली में दिए गए एक भाषण से शुरू हुआ। वे तीसरे ए.जी. नूरानी मेमोरियल लेक्चर को संबोधित कर रहे थे। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने संविधान विशेषज्ञ और लेखक ए.जी. नूरानी की किताब ‘The RSS: A Menace to India’ का जिक्र किया था।
अंसारी ने इस किताब की प्रस्तावना में दर्ज देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की एक टिप्पणी का हवाला दिया। अंसारी के अनुसार, नेहरू ने कहा था कि भारत के लिए असली खतरा कम्युनिज्म (साम्यवाद) से नहीं, बल्कि हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता से है।
नागरिक राष्ट्रवाद पर जताई थी चिंता
अपने व्याख्यान में पूर्व उपराष्ट्रपति ने देश के मौजूदा राजनीतिक और सामाजिक विमर्श पर भी चिंता जाहिर की थी। हामिद अंसारी ने कहा कि हाल के वर्षों में ऐसे रुझान और तौर-तरीके सामने आए हैं, जो ‘नागरिक राष्ट्रवाद’ (Civic Nationalism) की स्थापित अवधारणा को चुनौती दे रहे हैं और ‘सांस्कृतिक राष्ट्रवाद’ (Cultural Nationalism) को हावी कर रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस वैचारिक बदलाव के कारण धार्मिक पहचान के आधार पर नागरिकों के बीच भेदभाव किया जा रहा है, जिससे समाज के एक वर्ग में असुरक्षा का माहौल पैदा होने का खतरा बढ़ गया है।
