नोएडा, दादरी और जेवर में 2027 की सियासी बिसात, BJP के गढ़ में सेंध की तैयारी
दिल्ली से सटा गौतम बुद्ध नगर भले ही विधानसभा सीटों के लिहाज से उत्तर प्रदेश के सबसे छोटे जिलों में शुमार हो, लेकिन आर्थिक और सियासी अहमियत में इसका कद बेहद बड़ा है। नोएडा, ग्रेटर नोएडा और नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के कारण यह जिला हमेशा राष्ट्रीय पटल पर रहता है। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले यहां राजनीतिक तापमान चढ़ने लगा है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) जहां अपने इस अभेद्य गढ़ को बरकरार रखने की रणनीति पर काम कर रही है, वहीं समाजवादी पार्टी (SP) और बहुजन समाज पार्टी (BSP) इसमें सेंध लगाने की पुरजोर कोशिश में जुटी हैं।
गौतम बुद्ध नगर में कुल तीन विधानसभा सीटें आती हैं—नोएडा, दादरी और जेवर। ये तीनों सीटें सामान्य श्रेणी में हैं और यहां कोई भी सीट आरक्षित नहीं है।
2022 का जनादेश: तीनों सीटों पर भाजपा की एकतरफा जीत
साल 2022 के विधानसभा चुनाव में जिले की तीनों सीटों पर भाजपा ने विपक्ष का सूपड़ा साफ करते हुए भारी अंतर से जीत दर्ज की थी:
-
नोएडा विधानसभा: केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बेटे पंकज सिंह ने सपा के सुनील चौधरी को करीब 1 लाख 81 हजार वोटों के विशाल अंतर से हराया था। यह जिले की सबसे बड़ी चुनावी जीत दर्ज हुई थी।
-
दादरी विधानसभा: भाजपा के तेजपाल सिंह नागर ने सपा प्रत्याशी राजकुमार भाटी को करीब 1 लाख 38 हजार मतों के अंतर से शिकस्त दी थी।
-
जेवर विधानसभा: भाजपा के धीरेंद्र सिंह ने राष्ट्रीय लोकदल (RLD) के उम्मीदवार अवतार सिंह भड़ाना को करीब 56 हजार वोटों से पराजित किया था।
भट्टा-परसौल से मोदी लहर तक: यूं बदला जिले का सियासी मिजाज
जिले की राजनीति का एक बड़ा मोड़ 2011 का ऐतिहासिक ‘भट्टा-परसौल किसान आंदोलन’ रहा है। ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे के लिए हुए जमीन अधिग्रहण के विरोध में भड़के इस आंदोलन ने तत्कालीन राज्य सरकार को बैकफुट पर ला दिया था और इसका असर 2012 के विधानसभा चुनाव पर साफ दिखा था।
हालांकि, 2014 की मोदी लहर के बाद सियासी समीकरण पूरी तरह बदल गए। 2017 और 2022 दोनों ही चुनावों में भाजपा ने तीनों सीटों पर एकतरफा कब्जा जमाया। नोएडा और दादरी में बड़ी संख्या में गैर-प्रांतीय और कामकाजी शहरी मतदाता रहते हैं, जो परंपरागत जातीय समीकरणों से इतर सुरक्षा, इंफ्रास्ट्रक्चर और विकास के मुद्दे पर मतदान करते हैं। वहीं जेवर और ग्रामीण दादरी में स्थानीय किसान बिरादरियों का प्रभाव आज भी कायम है।
टिकट बदलने की चर्चा और विपक्ष की घेराबंदी
2027 के चुनाव से पहले जिले में सियासी सरगर्मियां बढ़ चुकी हैं। मार्च 2026 में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पहले चरण के उद्घाटन को भाजपा अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि के तौर पर पेश कर रही है। जवाब में सपा मुखिया अखिलेश यादव ने दादरी में बड़ी जनसभा कर सत्ता पक्ष को सीधी चुनौती दी, जबकि बसपा कार्यकर्ताओं ने भी राष्ट्रीय दलित प्रेरणा स्थल पर शक्ति प्रदर्शन किया है।
चर्चाएं इस बात की भी हैं कि भाजपा उन सीटों पर नए चेहरे उतारने पर विचार कर रही है जहां मौजूदा विधायक दो बार जीत चुके हैं और उनकी उम्र 60 वर्ष से अधिक हो चुकी है। इस संभावित फॉर्मूले के चलते दादरी सीट पर नए चेहरे को मौका मिलने की सियासी अटकलें तेज हैं। उधर, सपा जेवर सीट पर भी बड़ा शक्ति प्रदर्शन कर ग्रामीण मतदाताओं को लामबंद करने में लगी है।
तीनों सीटों का जातीय और सामाजिक ताना-बाना
-
नोएडा: यह पूरी तरह शहरीकृत क्षेत्र है। यहां बाहरी राज्यों से आई प्रवासी आबादी का सबसे बड़ा प्रभाव है। इसके साथ ही पंजाबी, ब्राह्मण और वैश्य समाज चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
-
दादरी: इस सीट पर गुर्जर और ठाकुर बिरादरी का पारंपरिक दबदबा है। इसके अलावा मुस्लिम और दलित मतदाताओं की संख्या भी परिणाम तय करने में अहम मानी जाती है।
-
जेवर: यहां जाट और गुर्जर किसान बिरादरी का मजबूत प्रभाव है। साथ ही दलित और मुस्लिम मतदाता भी अच्छी-खासी तादाद में मौजूद हैं।
जनसांख्यिकी के लिहाज से 1997 में गाजियाबाद और बुलंदशहर से अलग होकर बने इस जिले की करीब 59 प्रतिशत आबादी शहरों में रहती है। 2011 की जनगणना के अनुसार कुल आबादी करीब 16.48 लाख थी, जहां पुरुषों की संख्या 8.90 लाख और महिलाओं की 7.58 लाख दर्ज की गई थी। प्रवासी पुरुष कामगारों की अधिकता के कारण यहां का लिंगानुपात प्रति हजार पुरुषों पर 851 महिलाएं है, जबकि साक्षरता दर करीब 80 प्रतिशत के साथ प्रदेश में अग्रणी पायदान पर है।
