‘यह एक रोमांचक मुलाकात होगी’: एशियाई दौरे पर किम जोंग उन से मिल सकते हैं डोनाल्ड ट्रंप

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के केंद्र में हलचल तेज कर दी है। राष्ट्रपति ट्रंप ने संकेत दिया है कि वे अपने आगामी बहुपक्षीय एशियाई दौरे के दौरान उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता किम जोंग उन के साथ द्विपक्षीय वार्ता कर सकते हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति फिलीपींस में आयोजित होने वाले दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के संगठन (आसियान) शिखर सम्मेलन और उसके बाद चीन के शेन्ज़ेन में निर्धारित एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (एपेक) शिखर सम्मेलन में शिरकत करने के लिए एशिया की आधिकारिक यात्रा पर आ रहे हैं।

‘मेरी उनके साथ अच्छी बनती है’: ट्रंप का पत्रकारों को जवाब

सोमवार को व्हाइट हाउस और अंतरराष्ट्रीय प्रेस कॉर्प्स के पत्रकारों ने जब राष्ट्रपति ट्रंप से सीधा सवाल किया कि क्या वे अपने इस उच्च-स्तरीय एशियाई दौरे के दौरान प्योंगयांग के शासक किम जोंग उन से आमने-सामने की मुलाकात करेंगे, तो उन्होंने इस संभावना को सिरे से खारिज करने के बजाय सकारात्मक संकेत दिए।

ट्रंप ने अपने चिर-परिचित बेबाक अंदाज में जवाब देते हुए कहा, “मैं उनसे मिल सकता हूं… यह एक बेहद रोमांचक मुलाकात होगी। मेरी उनके साथ बहुत अच्छी बनती है।”

राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा व्यक्तिगत तालमेल और व्यक्तिगत कूटनीति पर दिया गया यह जोर सीधे तौर पर इस बात का संकेत माना जा रहा है कि वॉशिंगटन और प्योंगयांग के बीच बंद कमरों में बैक-चैनल संपर्क पूरी तरह निष्क्रिय नहीं हुए हैं।

आसियान और एपेक के मंच से साधेंगे क्षेत्रीय संतुलन

डोनाल्ड ट्रंप का यह दौरा रणनीतिक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है। फिलीपींस में आसियान मंच के जरिए जहां दक्षिण चीन सागर और हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा प्राथमिकताओं पर विचार-विमर्श होना है, वहीं चीन के शेन्ज़ेन में एपेक आर्थिक मंच पर वैश्विक व्यापार, आपूर्ति श्रृंखला और अमेरिका-चीन के द्विपक्षीय आर्थिक तनाव प्रमुख एजेंडे में शामिल रहेंगे।

इन दो महत्वपूर्ण सम्मेलनों के बीच उत्तर कोरिया के साथ संभावित संवाद की संभावना खुलने से पूरे पूर्वी एशिया के कूटनीतिक गलियारों में नई हलचल शुरू हो गई है। प्योंगयांग के मिसाइल परीक्षणों और परमाणु कार्यक्रम को लेकर लंबे समय से क्षेत्रीय स्थिरता पर सवाल उठते रहे हैं, और अमेरिकी राष्ट्रपति की यह यात्रा कोरियाई प्रायद्वीप के जटिल गतिरोध में एक नया मोड़ ला सकती है।

पहले कार्यकाल में हुई तीन ऐतिहासिक शिखर वार्ताएं

डोनाल्ड ट्रंप और किम जोंग उन के बीच शीर्ष-स्तरीय मुलाकातों का इतिहास ट्रंप के पहले कार्यकाल से जुड़ा हुआ है। दोनों नेताओं ने दशकों पुराने राजनयिक गतिरोध और शीतयुद्ध कालीन शत्रुता को दरकिनार करते हुए तीन बार आमने-सामने ऐतिहासिक संवाद किया था:

  1. सिंगापुर शिखर सम्मेलन (जून 2018): यह किसी पदासीन अमेरिकी राष्ट्रपति और उत्तर कोरियाई नेता के बीच इतिहास की पहली आधिकारिक बैठक थी। सेंटोसा द्वीप पर आयोजित इस बैठक में दोनों देशों ने नए संबंधों की स्थापना और कोरियाई प्रायद्वीप के पूर्ण निरस्त्रीकरण (Denuclearization) के प्रति साझा प्रतिबद्धता जताई थी।

  2. हनोई वार्ता (फरवरी 2019): वियतनाम की राजधानी हनोई में हुई यह दूसरी बैठक प्रतिबंधों में ढील देने की सीमा और परमाणु निरस्त्रीकरण की गति पर आम सहमति न बन पाने के कारण बिना किसी संयुक्त समझौते के समाप्त हो गई थी।

  3. असैन्यीकृत क्षेत्र (DMZ) में मुलाकात (जून 2019): उत्तर और दक्षिण कोरिया को विभाजित करने वाले पैनमुनजोम स्थित विसैन्यीकृत क्षेत्र (DMZ) में दोनों नेताओं की तीसरी मुलाकात हुई। इस दौरान डोनाल्ड ट्रंप उत्तर कोरियाई क्षेत्र में औपचारिक रूप से कदम रखने वाले पहले पदासीन अमेरिकी राष्ट्रपति बने थे।

वैश्विक सुरक्षा और कोरियाई प्रायद्वीप पर संभावित असर

हनोई वार्ता के विफल होने के बाद से ही अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच औपचारिक परमाणु वार्ताएं ठप पड़ी रही हैं। उत्तर कोरिया लगातार अपनी रक्षा क्षमताओं और सामरिक मिसाइल तकनीकों का आधुनिकीकरण करता रहा है, जबकि वाशिंगटन अपने सहयोगियों—दक्षिण कोरिया और जापान—के साथ सैन्य साझेदारी को सुदृढ़ करने पर केंद्रित रहा है।

यदि ट्रंप के इस एशियाई प्रवास के दौरान किसी तीसरे तटस्थ स्थान पर या सीमांत क्षेत्र में किम जोंग उन के साथ चौथी अनौपचारिक या औपचारिक बैठक का ढांचा तैयार होता है, तो यह वैश्विक भू-राजनीति में एक बड़ा रणनीतिक घटनाक्रम साबित होगा।