September 15, 2026

‘वोट चोरी आयोग’ और 47 लाख नाम गायब! SIR पर भड़का विपक्ष

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नई दिल्ली: चुनाव आयोग की स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) प्रक्रिया को लेकर देश भर में एक बड़ा सियासी बवाल खड़ा हो गया है। दिल्ली से लेकर महाराष्ट्र, झारखंड, बंगाल और कर्नाटक तक की वोटर लिस्ट से लाखों नाम काटे जाने पर विपक्षी पार्टियों ने आयोग पर गंभीर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का आरोप है कि ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से बड़े पैमाने पर वोटरों को बाहर किया जा रहा है और इसके पीछे एक सोची-समझी रणनीति है।

झारखंड: मुस्लिम वोटरों के नाम काटने का आरोप

झारखंड को लेकर सबसे ज्यादा विवाद हो रहा है। ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के मुताबिक, गोड्डा में बीजेपी के एक बूथ लेवल एजेंट (BLA) ने फॉर्म 7 के जरिए ड्राफ्ट लिस्ट में शामिल मुस्लिम वोटरों के नाम हटाने की मांग की थी। हालांकि, कम से कम चार बूथों पर बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLO) ने इन आवेदनों को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि ये प्रक्रिया के हिसाब से सही नहीं हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि जिन लोगों के नाम कटवाने की कोशिश हुई, वे पीढ़ियों से गांव में रह रहे हैं और 2003 के वेरिफिकेशन में भी शामिल थे।

इस पर राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा, “अखबार की जांच से पता चला है कि मुस्लिमों को निशाना बनाया जा रहा है। झारखंड में विपक्ष की सरकार है तो वहां ज्यादा दबाव नहीं डाल सकते, लेकिन जहां इनकी सरकार है, वहां हद मचा दी गई है। मुख्य चुनाव आयुक्त का मकसद सिर्फ यह है कि जो बीजेपी का वोटर नहीं है, उसका नाम काट दो।”

राहुल गांधी ने बोला ‘वोट चोरी आयोग’

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने SIR प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर लिखा, “भाजपा और ‘वोट चोरी आयोग’ के तरीके बदलते रहते हैं—मकसद बस एक ही है: किसी भी कीमत पर बीजेपी की जीत।”

राहुल ने महाराष्ट्र और बंगाल के आंकड़े देते हुए कहा, “बंगाल 2026 में SIR के दौरान कटे 91% नाम अपील के बाद वापस जोड़ने पड़े। महाराष्ट्र में 2.07 करोड़ मतदाताओं को ड्राफ्ट लिस्ट से बाहर कर दिया गया—यानी हर पांचवां वोटर। कौन सी लिस्ट सही थी? यह साफ तौर पर वोट चोरी है।”

महाराष्ट्र और दिल्ली में लाखों नाम गायब

  • महाराष्ट्र: राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी ने सोमवार को बताया कि SIR प्रक्रिया के बाद 2.06 करोड़ से ज्यादा वोटर (पिछले बेस का 21.14%) ड्राफ्ट रोल में शामिल नहीं हैं। अधिकारी के अनुसार, ये फॉर्म या तो मिले नहीं, संबंधित व्यक्तियों की मौत हो गई या उन्होंने घर बदल लिया था।

  • दिल्ली: दिल्ली में 1.45 करोड़ वोटरों में से 47 लाख से ज्यादा नाम हटा दिए गए हैं। इनमें से 43.32 लाख वोटर या तो कहीं और चले गए या SIR के दौरान नहीं मिले।

दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल ने तंज कसते हुए कहा, “भारत सरकार नाहक ही जनसंख्या को लेकर परेशान हो रही है। SIR के ज़रिए चुनाव आयोग हमारे देश की जनसंख्या 140 करोड़ से घटाकर 50 करोड़ कर देगा।”

बंगाल और कर्नाटक में भी भारी विरोध

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी इस मुद्दे पर आक्रामक हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी ने चुनाव आयोग का इस्तेमाल करके विधानसभा चुनाव को हाईजैक किया और लाखों नाम गैर-कानूनी तरीके से हटाए। राज्य में अभी भी 36.6 लाख मामले अपीलेट ट्रिब्यूनल में पेंडिंग हैं।

वहीं, कर्नाटक में कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने सीएम डीके शिवकुमार का वह पत्र साझा किया, जो उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लिखा है। शिवकुमार ने बताया कि राज्य में 1.08 करोड़ वोटरों को ASDDO मार्क किया गया है और करीब 43 लाख वोटर्स को लॉजिकल गड़बड़ियों के लिए नोटिस भेजे जाने हैं, जिस पर उन्होंने वेरिफिकेशन का समय बढ़ाने की मांग की है।

चुनाव आयोग का पक्ष

इन तमाम विवादों के बीच चुनाव आयोग अपनी पीठ थपथपाता रहा है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने हाल ही में कहा था कि भारत की चुनाव प्रक्रिया और SIR मॉडल को दूसरे देश भी समझ रहे हैं और अपनाना चाहते हैं। हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी सोशल मीडिया पर SIR प्रक्रिया को लेकर भारत की तारीफ की थी।