अटाकामा के सूखे रेगिस्तान में खिले फूल, टोक्यो में 35 दिन लगातार बारिश, दुनिया पर ‘अल नीनो’ का बड़ा असर
‘अल नीनो’ (El Nino) के प्रभाव के बीच दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में मौसम के बेहद असामान्य और हैरान करने वाले रूप (Extreme Weather) देखने को मिल रहे हैं। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने चेतावनी दी है कि इस प्राकृतिक जलवायु घटना का असर फरवरी 2027 तक बने रहने की आशंका है।
‘अल नीनो’ समुद्र के तापमान और वायुमंडलीय परिस्थितियों को इस कदर प्रभावित करता है कि दुनिया के कई हिस्सों में बारिश और तापमान का सामान्य पैटर्न पूरी तरह बदल जाता है। फिलहाल दुनिया के एक हिस्से में जहां लगातार रिकॉर्ड तोड़ बारिश से लोग त्राहि-त्राहि कर रहे हैं, वहीं दूसरे हिस्से में दुनिया के सबसे सूखे रेगिस्तान में अचानक फूलों की चादर बिछ गई है।
दुनिया के सबसे सूखे रेगिस्तान में फूलों की बहार
चिली का अटाकामा रेगिस्तान (Atacama Desert) दुनिया के सबसे गर्म और सबसे सूखे रेगिस्तानों में गिना जाता है। प्रशांत महासागर और एंडीज पर्वतमाला के बीच करीब 1,600 किलोमीटर तक फैले इस रेगिस्तान में जीवन की उम्मीद न के बराबर रहती है।
लेकिन इस साल जुलाई और अगस्त के दौरान चिली के उत्तरी तटीय क्षेत्रों में अप्रत्याशित और रिकॉर्ड तोड़ बारिश हुई (कुछ जगहों पर 180 मिलीमीटर से अधिक)। इस भारी बारिश का नतीजा सितंबर में देखने को मिला, जब इस सूखे रेगिस्तान में एक अनोखा और दुर्लभ नजारा उभर कर सामने आया।
अटाकामा के विशाल इलाके में अचानक करीब 200 प्रजातियों के फूलों के बीज फूट पड़े और दूर-दूर तक सूखी जमीन पर बैंगनी (Purple) रंग के फूलों की खूबसूरत चादर बिछ गई। पर्यटकों ने इस अद्भुत नजारे की कई तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर की हैं, जो तेजी से वायरल हो रही हैं।
टोक्यो में 35 दिन की बारिश ने तोड़ा 138 साल का रिकॉर्ड
एक तरफ रेगिस्तान में फूल खिल रहे हैं, तो दूसरी तरफ जापान की राजधानी टोक्यो भारी बारिश से बेहाल है। टोक्यो में लगातार बारिश ने लोगों की मुश्किलें इस कदर बढ़ा दी हैं कि सब्जियों की कीमतों में भारी उछाल आ गया है।
स्थानीय मीडिया के मुताबिक, टोक्यो में लगातार 35 दिनों तक बारिश दर्ज की गई है। साल 1886 के बाद से यानी पिछले 138 सालों में बारिश का यह सबसे लंबा दौर बताया जा रहा है। इससे पहले 2019 में लगातार 33 दिनों तक बारिश दर्ज की गई थी।
सितंबर के महीने में मध्य टोक्यो में सामान्य से करीब तीन गुना अधिक बारिश हुई और आलम यह था कि महीने के 14 दिनों तक लोगों को सूरज ही दिखाई नहीं दिया। हालांकि, मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि टोक्यो की इस भीषण बारिश को केवल ‘अल नीनो’ से जोड़ना पूरी तरह सही नहीं होगा, क्योंकि इसमें स्थानीय मौसमी वर्षा प्रणालियों और तूफानों की भी बड़ी भूमिका है।
1950 के बाद का सबसे शक्तिशाली ‘अल नीनो’
विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के ताजा आकलन के मुताबिक, वर्तमान ‘अल नीनो’ इस साल दिसंबर के आसपास अपने चरम (Peak) पर पहुंच सकता है और इसका प्रभाव फरवरी 2027 तक बने रहने की पूरी संभावना है।
WMO ने इसे साल 1950 के बाद के सबसे शक्तिशाली ‘अल नीनो’ घटनाक्रमों में से एक करार दिया है, जिसका मतलब है कि आने वाले महीनों में दुनिया के अन्य हिस्सों में भी मौसम के इसी तरह के चरम (Extreme) और असामान्य रूप देखने को मिल सकते हैं।
