कच्चे माल की कीमतों में उछाल और सप्लाई में देरी से 20% तक महंगे हो सकते हैं पटाखे

PATAKHE

दीवाली का त्योहार नजदीक आते ही बाजार गुलजार होने लगे हैं और पटाखों की खरीदारी की तैयारियां शुरू हो गई हैं। लेकिन इस बार आतिशबाजी का शौक लोगों की जेब पर काफी भारी पड़ सकता है। बाजार से मिल रहे संकेतों और पटाखा कारोबारियों के मुताबिक, कच्चे माल (Raw Materials) की कीमतों में भारी उछाल और फैक्ट्रियों पर प्रशासन की सख्ती के चलते इस साल पटाखों के दाम 15 से 20 फीसदी तक बढ़ने की आशंका है।

भारत में पटाखों के उत्पादन का सबसे बड़ा हब तमिलनाडु का शिवकाशी (Sivakasi) है, जहां से देश के हर कोने में सप्लाई होती है। इस बार शिवकाशी के निर्माताओं को उत्पादन लागत बढ़ने की दोहरी मार झेलनी पड़ रही है, जिसका सीधा असर त्योहार की खरीदारी करने वाले आम ग्राहकों के बजट पर पड़ेगा।

केमिकल और कच्चे माल की कीमतों में भारी उछाल

पटाखा उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले रसायनों की कीमतों में इस साल अप्रत्याशित बढ़ोतरी हुई है। पटाखा कारोबार से जुड़े लोगों के मुताबिक, उत्पादन में अहम भूमिका निभाने वाले सल्फर की कीमत जो कभी 75 रुपये प्रति किलो हुआ करती थी, वह बीच में उछलकर 140 रुपये तक पहुंच गई थी। हालांकि बाद में इसमें थोड़ी गिरावट आई और यह करीब 100 रुपये प्रति किलो पर स्थिर हुई।

इसके अलावा, पटाखे बनाने में इस्तेमाल होने वाली अन्य जरूरी सामग्री जैसे एल्युमिनियम और सोडियम नाइट्रेट के दाम भी लगभग 30 फीसदी तक महंगे हो गए हैं, जिससे निर्माताओं की लागत सीधे तौर पर बढ़ गई है।

खाड़ी क्षेत्र के तनाव से सप्लाई में देरी

महंगे कच्चे माल के अलावा पटाखा निर्माता आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) से जुड़ी बाधाओं का भी सामना कर रहे हैं। खाड़ी क्षेत्र में शिपिंग में आ रही दिक्कतों के कारण सल्फर और चिपकाने वाले पदार्थों (Adhesives) की आपूर्ति में काफी देरी हुई है। सामान फैक्ट्रियों तक पहुंचने में अधिक समय लगने से उत्पादन प्रक्रिया धीमी हो रही है और खर्च बढ़ रहा है। कारोबारियों का अनुमान है कि केवल इन कारणों से पटाखे बनाने की कुल लागत में करीब 15 फीसदी तक का इजाफा हो सकता है।

सुरक्षा नियमों की सख्ती का भी असर

कच्चे माल और सप्लाई के अलावा, प्रशासन द्वारा सुरक्षा नियमों की सख्ती भी उत्पादन पर असर डाल रही है। दरअसल, पिछले 10 महीनों में पटाखा फैक्ट्रियों में 24 बड़े हादसे हुए हैं, जिनमें 41 लोगों की जान चली गई और 39 लोग घायल हुए। इन हादसों को देखते हुए प्रशासन ने 700 से अधिक इकाइयों का निरीक्षण किया है और सुरक्षा जांच तेज कर दी है। अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि खतरनाक सामग्री से जुड़े इस कारोबार में सुरक्षा नियमों का कड़ाई से पालन होना जरूरी है। इस सख्ती के चलते उत्पादन की रफ्तार पर भी दबाव पड़ा है।

बाजार में कितने महंगे मिलेंगे पटाखे?

बढ़ी हुई लागत का असर बाजार में दिखने लगा है। अक्टूबर के दूसरे सप्ताह के थोक भाव के अनुसार, बाजार में 10 बड़े अनार के पैकेट की कीमत करीब 55 रुपये, 10 स्पेशल ग्राउंड स्पिनर की कीमत 80 रुपये और पांच दो-आवाज वाले रॉकेट की कीमत 70 रुपये तक बताई जा रही है।

कारोबारियों का कहना है कि जैसे-जैसे त्योहार करीब आएगा और मांग (Demand) बढ़ेगी, वैसे-वैसे खुदरा बाजार में कीमतें और ऊपर जा सकती हैं। ग्राहकों को इस बार अपने आतिशबाजी के शौक को पूरा करने के लिए ज्यादा बजट लेकर बाजार निकलना होगा।