September 15, 2026

महंगे कैंसर इंजेक्शन में निकला बैक्टीरिया: नकली दवा सिंडिकेट का भंडाफोड़

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नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने सात राज्यों में फैले कैंसर की नकली और कालाबाजारी की जाने वाली दवाओं के एक बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। जांच में सामने आया है कि ब्लैक मार्केट में एक-एक लाख रुपये में बेचे जा रहे ‘एवालुमैब’ (Avelumab) इंजेक्शन में कैंसर से लड़ने वाला कोई एक्टिव इंग्रीडिएंट था ही नहीं, बल्कि उसमें केवल पानी और बैक्टीरिया भरे हुए थे। दवा निर्माता कंपनी द्वारा जब इस इंजेक्शन की जांच जर्मनी स्थित मर्क लैब से कराई गई, तब इस खतरनाक फर्जीवाड़े की पुष्टि हुई।

क्राइम ब्रांच के मुताबिक, करीब 9 करोड़ रुपये का यह काला कारोबार दिल्ली-एनसीआर, महाराष्ट्र, हैदराबाद, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान तक फैला हुआ था। इस गिरोह के तार राजस्थान की भजन लाल सरकार की उस योजना से भी जुड़े मिले हैं, जिसके तहत कैंसर के मरीजों को मुफ्त या रियायती दवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। पुलिस ने अब तक इस मामले में सरगना डॉ. मनीष शर्मा समेत 17 लोगों को गिरफ्तार किया है।

7 राज्यों में नेटवर्क, छापे में 50 लाख कैश और विदेशी दवाएं बरामद

क्राइम ब्रांच को 22 जून को इस गिरोह का पहला सुराग मिला था, जिसके बाद ताबड़तोड़ छापेमारी कर 17 आरोपियों को दबोचा गया। पुलिस ने इनके पास से 588 भरी हुई एंटी-कैंसर वायल, 6 खाली वायल, 7 खाली दवा के बॉक्स, अन्य दवाओं की 3021 यूनिट और करीब 50 लाख रुपये नकद बरामद किए।

बरामद दवाओं में बाजार में लाखों रुपये कीमत वाली डार्जालेक्स, इमफिंजी, एरबिटक्स, ऑपडाइटा, गाजीवा, बावेन्सियो, एडसेट्रिस और कीट्रूडा जैसी महंगी और जीवनरक्षक कैंसर दवाएं शामिल हैं।

3 तरीकों से सिंडिकेट तक पहुंचती थीं दवाएं

11 जुलाई को ड्रग्स विभाग और स्थानीय पुलिस की सात संयुक्त टीमों ने पूर्वी दिल्ली, रोहिणी और नवी मुंबई में व्यापक छापेमारी की। पूछताछ में खुलासा हुआ कि यह सिंडिकेट तीन मुख्य तरीकों से दवाओं का स्टॉक जुटाता था:

  • अवैध स्रोतों से नकली दवाएं: गिरोह गैर-कानूनी ठिकानों से सीधे तौर पर नकली दवाएं खरीदता था।

  • सरकारी अस्पतालों से हेराफेरी: सरकारी अस्पतालों में कैंसर मरीजों के लिए आवंटित दवाओं में हेरफेर कर उन्हें बाहर निकाला जाता था।

  • सरकारी गोदामों से चोरी: सरकारी संस्थानों और केंद्रीय गोदामों से सप्लाई की खेप चुराई जाती थी।

गिरोह फर्जी बिल, फर्जी खरीद रिकॉर्ड और अवैध ड्रग लाइसेंस के जरिए यह स्टॉक तैयार करता था और फिर बिचौलियों के जरिए इसे जरूरतमंद मरीजों तक महंगे दामों में पहुंचाता था।

असली डिब्बे, एसीटोन से बैच नंबर मिटाकर नई पैकिंग

आरोपियों से पूछताछ में पैकेजिंग के खेल की हैरान करने वाली जानकारी सामने आई है। गिरोह के सदस्य असली दवाओं के खाली कार्टन और बॉक्स संभालकर रख लेते थे। इन खाली शीशियों और डिब्बों से एसीटोन केमिकल का इस्तेमाल कर पुराना बैच नंबर, एक्सपायरी और एमआरपी (MRP) मिटा दिया जाता था। इसके बाद नकली लिक्विड भरकर थर्मोकोल बॉक्स, बबल रोल, टेप और पॉलीथीन के जरिए उन्हें बिल्कुल नई और सीलबंद पैकिंग का रूप दिया जाता था।

छापेमारी के दौरान पुलिस को दवाओं के कच्चे माल और कैश के अलावा बड़े पैमाने पर लेन-देन से जुड़ा रजिस्टर और डायरी भी मिली है।

किसे कहां से पकड़ा गया और क्या हुआ बरामद?

पुलिस के अनुसार, इस सिंडिकेट में दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम, झज्जर, फरीदाबाद, मुंबई, गाजियाबाद और हैदराबाद के लोग शामिल हैं।

  • लक्ष्मी नगर (दिल्ली): पुलिस ने अभिषेक वैश्य से 4 लाख रुपये, जबकि शुभम कुमार चौधरी और सूरज चौधरी के पास से करीब 23 लाख रुपये बरामद किए।

  • नोएडा: आरोपी आनंद कुमार के पास से 337 एंटी-कैंसर वायल बरामद की गईं।

  • फरीदाबाद: दीपक उर्फ रवि के ठिकाने से 108 वायल और 6.5 लाख रुपये कैश मिला।

  • गुरुग्राम: मयंक गर्ग के पास से 55 वायल जब्त की गईं।

इस पूरे मामले में 12 जुलाई को क्राइम ब्रांच थाने में औपचारिक एफआईआर दर्ज की गई थी। पुलिस की जांच अब इस बात पर टिकी है कि नकली दवाओं का मुख्य मैन्युफैक्चरिंग सोर्स कहां था और देश के किन-किन अस्पतालों या मेडिकल स्टोर्स तक इस जानलेवा सिंडिकेट की सप्लाई चेन फैली हुई थी।