September 15, 2026

Samik Bhattacharya 1946 Riots Row: दुर्गा पूजा से पहले बंगाल में सियासी घमासान

Samik Bhattacharya

कोलकाता में दुर्गा पूजा की औपचारिक शुरुआत माने जाने वाले ‘खूंटी पूजा’ कार्यक्रम से ही सियासी पारा चढ़ गया है। पश्चिम बंगाल भाजपा के अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने 1946 के सांप्रदायिक दंगों का जिक्र कर एक नया विवाद खड़ा कर दिया है, जिस पर सत्तारूढ़ टीएमसी (TMC) और विपक्षी दल कांग्रेस ने कड़ी आपत्ति जताई है।

समिक भट्टाचार्य का दावा: ‘गैर-बंगालियों ने बचाया था अस्तित्व’ मध्य कोलकाता के बोबाजार इलाके में शतदल संघ द्वारा आयोजित कार्यक्रम में भाजपा नेता ने 1946 के दंगों के दौरान गैर-बंगाली समुदायों की भूमिका को रेखांकित किया:

  • गुप्ता और जायसवाल समुदाय का जिक्र: भट्टाचार्य ने कहा कि अगर मुश्किल समय में इन समुदायों ने तलवार बनाने के लिए लोहा उपलब्ध कराने में अपनी संपत्ति खर्च नहीं की होती, तो आज उत्तर कोलकाता के संपन्न बंगालियों का अस्तित्व ही नहीं होता।

  • मूर्तिकारों की हत्या का मुद्दा: उन्होंने मुर्शिदाबाद में मूर्तिकार पिता-पुत्र (हरगोविंद दास और चंदन दास) की हत्या का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि उनकी हत्या सरस्वती, लक्ष्मी और काली की मूर्तियां बनाने की प्रतिभा के कारण की गई।

  • विसर्जन पर सवाल: पूर्ववर्ती टीएमसी सरकार पर तुष्टीकरण का आरोप लगाते हुए उन्होंने बेलडांगा का उदाहरण दिया, जहां पहले भारत सेवाश्रम संघ को दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के लिए नदी तक पहुंचने से रोका गया था।

विपक्ष का तीखा पलटवार भाजपा नेता के इस बयान को विपक्षी दलों ने चुनावी हथकंडा और बंगाली अस्मिता पर चोट करार दिया है।

  • टीएमसी का वार: टीएमसी प्रवक्ता कुणाल घोष ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे बंगालियों का सीधा “अपमान” बताया। उन्होंने कहा कि बंगालियों का स्वतंत्रता आंदोलन में अपना समृद्ध इतिहास, विशिष्टता और गौरवशाली परंपरा रही है।

  • कांग्रेस का आरोप: बंगाल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने भाजपा पर आगामी नगर निकाय चुनावों से पहले लोगों को बांटने का आरोप लगाया। उन्होंने याद दिलाया कि गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर खुद बंगाल के विभाजन को रोकने के लिए सड़कों पर उतरे थे और भाजपा जानबूझकर इस सांस्कृतिक विरासत को तोड़ने की कोशिश कर रही है।