JDU को हराने वाले निर्दलीय MLC की BJP में एंट्री पर बवाल, चिराग पासवान ने याद दिलाए ‘कानूनी पेंच’

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बिहार विधान परिषद (MLC) चुनाव के नतीजों के बाद दो निर्दलीय उम्मीदवारों के भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने से सियासत गरमा गई है। सारण से जीते निर्दलीय एमएलसी राहुल राज और तिरहुत से जीते वंशीधर बृजवासी की भाजपा में एंट्री ने एनडीए (NDA) के भीतर ही विवाद खड़ा कर दिया है। इस राजनीतिक घटनाक्रम पर जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने कड़ी आपत्ति जताई है। सहयोगी दल की इस नाराजगी के बीच लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान ने भी निर्दलीय विधायकों के किसी पार्टी में शामिल होने से जुड़ी कानूनी अड़चनों का जिक्र कर दिया है।

चिराग पासवान ने दी सधी हुई प्रतिक्रिया

निर्दलीय एमएलसी के बीजेपी में शामिल होने को लेकर पूछे गए सवाल पर केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने सधी हुई प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उन्हें आधिकारिक तौर पर यह नहीं पता है कि इन निर्दलीय एमएलसी को पार्टी में औपचारिक रूप से मिलाया गया है या नहीं, क्योंकि इस प्रक्रिया में कुछ कानूनी बाध्यताएं आ सकती हैं।

चिराग ने स्पष्ट किया कि यदि कोई भी एमएलसी किसी सरकार, दल या गठबंधन का समर्थन करना चाहता है, तो इसमें कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि समर्थन देने में कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन कानूनी प्रक्रियाओं को ध्यान में रखना जरूरी होगा।

जन सुराज ने दी कानूनी लड़ाई की चेतावनी

इस पूरे मामले को प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने भी जोर-शोर से उठाया है। जन सुराज ने विधान परिषद के नियमों का हवाला देते हुए आरोप लगाया है कि चुनाव के बाद किसी भी समय कोई निर्दलीय प्रत्याशी अगर किसी राजनीतिक दल की सदस्यता लेता है, तो उसकी विधान परिषद की सदस्यता रद्द हो जाएगी। पार्टी ने दोनों एमएलसी को भाजपा में शामिल करने की प्रक्रिया को गैर-संवैधानिक करार दिया है। जन सुराज ने इस मुद्दे पर विधान परिषद के सभापति से शिकायत दर्ज कराने और कानूनी लड़ाई लड़ने का ऐलान किया है।

JDU की नाराजगी की क्या है वजह?

इस घटनाक्रम ने बिहार एनडीए के भीतर सबकुछ ठीक न होने के कयासों को हवा दे दी है। निर्दलीय विधायकों के भाजपा में जाने से जेडीयू नेतृत्व असहज है। पार्टी के अंदरखाने नाराजगी की मुख्य वजह यह है कि दोनों ही निर्दलीय उम्मीदवारों (राहुल राज और वंशीधर बृजवासी) ने चुनाव में सीधे तौर पर जेडीयू के उम्मीदवारों को ही शिकस्त दी थी। अपने उम्मीदवारों को हराने वाले नेताओं को सहयोगी दल द्वारा शामिल किए जाने पर पार्टी ने आपत्ति दर्ज कराई है।

27 अक्टूबर को घोषित हुए थे MLC चुनाव के नतीजे

बीते 27 अक्टूबर को बिहार में 4 शिक्षक और 4 स्नातक MLC सीटों के चुनाव परिणाम घोषित किए गए थे। इन नतीजों में दो सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की थी। इसके अलावा, दो सीटों पर राष्ट्रीय जनता दल (RJD), एक पर JDU और एक सीट पर जन सुराज पार्टी के प्रत्याशी ने जीत हासिल की थी। नतीजों के तुरंत बाद दोनों निर्दलीय विजेताओं ने भाजपा का दामन थाम लिया, जिस पर अब कानूनी और राजनीतिक सवाल खड़े हो रहे हैं।