2027 चुनाव से पहले समझें बाराबंकी का सियासी और जातीय समीकरण

akhilesh yadav

बाराबंकी जिला उत्तर प्रदेश की सियासत में बेहद संवेदनशील और रणनीतिक माना जाता है। 2022 के विधानसभा चुनाव में यह जिला उन गिने-चुने इलाकों में शामिल था, जहां भारतीय जनता पार्टी (BJP) और समाजवादी पार्टी (SP) के बीच मुकाबला बिल्कुल बराबरी का रहा था। जिले की कुल 6 सीटों में से दोनों दलों ने 3-3 सीटें आपस में बांटी थीं। यहां चुनावी प्रतिस्पर्धा का आलम यह था कि दो सीटों पर जीत-हार का अंतर 300 वोटों से भी कम रहा।

2027 के विधानसभा चुनाव से पहले जिले की राजनीतिक सरगर्मी इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि मुकाबला सिर्फ भाजपा बनाम विपक्ष का नहीं है। 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत के बाद अब विपक्षी गठबंधन के भीतर भी सीटों के बंटवारे को लेकर रस्साकशी शुरू हो गई है।

जनसांख्यिकी और सामाजिक ताना-बाना

2011 की जनगणना के अनुसार बाराबंकी जिले की कुल आबादी करीब 32 लाख 61 हजार दर्ज की गई थी। जिले का लिंगानुपात प्रति हजार पुरुषों पर 910 महिलाओं का है, जबकि औसत साक्षरता दर 62 प्रतिशत के आसपास है।

जिले का चरित्र मुख्य रूप से ग्रामीण है, जहां लगभग 90 प्रतिशत आबादी गांवों में रहती है और सिर्फ 10 प्रतिशत शहरों में निवास करती है। धार्मिक संरचना की बात करें तो यहां हिंदू आबादी लगभग 77 प्रतिशत और मुस्लिम आबादी करीब 23 प्रतिशत है। ग्रामीण पृष्ठभूमि और सामाजिक संतुलन के चलते हर सीट पर जातीय समीकरण चुनाव परिणामों को गहराई से प्रभावित करते हैं।

6 विधानसभा सीटें: 2 सुरक्षित, 1 सीट फैजाबाद लोकसभा में शामिल

बाराबंकी जिले के तहत कुल छह विधानसभा सीटें आती हैं: कुर्सी, रामनगर, बाराबंकी (सदर), जैदपुर, दरियाबाद और हैदरगढ़।

  • इनमें से जैदपुर और हैदरगढ़ सीटें अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित हैं, जबकि शेष चार सीटें सामान्य वर्ग के अंतर्गत आती हैं।

  • संसदीय भूगोल के लिहाज से रामनगर, बाराबंकी सदर, जैदपुर और हैदरगढ़ सीटें बाराबंकी लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा हैं। वहीं, दरियाबाद विधानसभा सीट प्रशासनिक रूप से बाराबंकी में होने के बावजूद फैजाबाद (अयोध्या) संसदीय क्षेत्र के दायरे में आती है।

2022 का चुनावी हिसाब: कांटे की टक्कर में बंटी थीं सीटें

पिछले विधानसभा चुनाव में दोनों प्रमुख दलों के बीच कड़ा संघर्ष देखने को मिला था:

  • कुर्सी: यहां प्रदेश के सबसे करीबी मुकाबलों में से एक देखा गया। भाजपा के सकेंद्र प्रताप वर्मा ने सपा के राकेश कुमार वर्मा को महज 217 वोटों के अंतर से हराया था। सकेंद्र वर्मा को 1,18,720 और राकेश वर्मा को 1,18,503 वोट मिले थे।

  • रामनगर: इस सीट पर सपा के फरीद महफूज किदवई ने भाजपा के शरद अवस्थी को केवल 261 वोटों से पराजित किया।

  • बाराबंकी (सदर): सपा के धर्मराज सिंह यादव उर्फ सुरेश यादव ने भाजपा की डॉ. रामकुमारी मौर्य को 35,050 वोटों के बड़े अंतर से मात दी।

  • जैदपुर (सुरक्षित): सपा के गौरव रावत ने भाजपा के अंबरीश रावत को 2,982 मतों से हराया।

  • दरियाबाद: भाजपा के सतीश चंद्र शर्मा ने सपा के पूर्व कैबिनेट मंत्री अरविंद सिंह गोप को लगभग 32 हजार वोटों के अंतर से शिकस्त दी।

  • हैदरगढ़ (सुरक्षित): भाजपा के दिनेश रावत ने सपा प्रत्याशी राम मगन को हराकर 1,17,133 वोटों के साथ जीत दर्ज की थी।

चुनावी इतिहास: परिसीमन के बाद बदला शक्ति संतुलन

बाराबंकी का मौजूदा चुनावी भूगोल 2008 के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आया, जिस पर पहला चुनाव 2012 में हुआ था। उस समय जिले में सपा का पलड़ा भारी रहा।

2017 की लहर में भाजपा ने जोरदार वापसी करते हुए छह में से पांच सीटों पर कब्जा जमाया था। उस दौर में केवल बाराबंकी सदर सीट ही सपा बचा पाई थी। बाराबंकी सदर से धर्मराज सिंह यादव 2012, 2017 और 2022 में लगातार तीन बार चुनाव जीते हैं और हर बार उनकी जीत का अंतर बढ़ा है।

जैदपुर सीट (पूर्व नाम मसौली) पर ऐतिहासिक रूप से कांग्रेस नेता मोहसिना किदवई के परिवार का प्रभाव रहा है। वहीं हैदरगढ़ सीट वह क्षेत्र है जहां से राजनाथ सिंह ने मुख्यमंत्री रहते हुए उपचुनाव लड़ा था। परंपरागत रूप से कांग्रेस और भाजपा का असर रखने वाली इस सीट पर 2017 और 2022 दोनों बार भाजपा ने जीत दर्ज की।

सीटों के जातीय समीकरण

  • कुर्सी: कुर्मी मतदाता यहां सबसे बड़ा सामाजिक समूह हैं। इसके अलावा मुस्लिम, यादव, ठाकुर और दलित मतदाताओं की संख्या भी चुनावी दृष्टि से प्रभावी है।

  • रामनगर: मुस्लिम, यादव और कुर्मी मतदाताओं के साथ सवर्ण मतदाता यहां अहम भूमिका में रहते हैं। स्थानीय स्तर पर किदवई परिवार का प्रभाव माना जाता है।

  • बाराबंकी (सदर): स्थानीय अनुमानों के मुताबिक यादव मतदाता करीब 20 प्रतिशत के साथ सबसे बड़ा वर्ग हैं। वहीं मुस्लिम और कुर्मी मतदाताओं की हिस्सेदारी करीब 16-16 प्रतिशत मानी जाती है।

  • जैदपुर (सुरक्षित): इस सीट पर मुस्लिम, कुर्मी (वर्मा) और रावत मतदाता लगभग 68-68 हजार के करीब माने जाते हैं। यादव करीब 54 हजार, गौतम करीब 40 हजार तथा ब्राह्मण व अन्य पिछड़ा वर्ग 35-35 हजार के आसपास हैं।

  • दरियाबाद: यहां ब्राह्मण, कुर्मी, यादव और दलित मतदाताओं का मिलाजुला प्रभाव देखने को मिलता है।

  • हैदरगढ़ (सुरक्षित): रावत समाज की संख्या यहां सबसे ज्यादा मानी जाती है। इसके अलावा कुर्मी (वर्मा), यादव, ब्राह्मण, गौतम और ठाकुर मतदाताओं की मौजूदगी है।

2027 से पहले सपा-कांग्रेस के बीच खींचतान

2024 के लोकसभा चुनाव में बाराबंकी सीट से इंडिया गठबंधन के तहत कांग्रेस के तनुज पुनिया ने जीत हासिल की थी। इस जीत के बाद से जिले का राजनीतिक परिदृश्य बदला है।

2027 के चुनाव से पहले बाराबंकी जिला सपा और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे की अहम परीक्षा बनता दिख रहा है। सपा जहां अपने तीन मौजूदा विधायकों और 2022 के प्रदर्शन के दम पर सभी छह सीटों पर मजबूत दावेदारी कर रही है, वहीं कांग्रेस कम से कम तीन विधानसभा सीटों की मांग पर जोर दे रही है। दूसरी तरफ, भाजपा दरियाबाद, हैदरगढ़ और बेहद कम अंतर से जीती गई कुर्सी सीट पर अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखने के साथ अन्य सीटों पर वापसी की योजना पर काम कर रही है।