एयर इंडिया ने मांगे 1.5 अरब डॉलर, टाटा संस से फंडिंग की मांग क्यों?
नई दिल्ली: टाटा ग्रुप के नियंत्रण में आने के बाद एयर इंडिया को दोबारा पटरी पर लाने की कोशिशों के बीच एयरलाइन को बड़ी पूंजी की जरूरत पड़ रही है। एयर इंडिया ने अपने शेयरधारकों टाटा संस और सिंगापुर एयरलाइंस से करीब 1.5 अरब डॉलर की फंडिंग मांगी है। यह रकम 2021 में टाटा ग्रुप के नियंत्रण में आने के बाद एयरलाइन को शेयरधारकों से मिलने वाली बड़ी फंडिंग में शामिल हो सकती है।
रिपोर्ट के अनुसार, एयर इंडिया को यह रकम एक साथ देने के बजाय किश्तों में मिलने की संभावना है। सिंगापुर एयरलाइंस अपनी हिस्सेदारी के मुताबिक इसमें करीब 25 फीसदी हिस्सा देगी। टाटा संस ने मार्च 2026 तक एयर इंडिया में अतिरिक्त इक्विटी निवेश रोक रखा था।
एयर इंडिया को क्यों चाहिए इतनी बड़ी रकम?
एयर इंडिया को दोबारा मजबूत करने की प्रक्रिया अनुमान से ज्यादा महंगी और धीमी साबित हो रही है। एयरलाइन को अपने पुराने सिस्टम, फ्लीट, ऑपरेशनल ढांचे और कर्मचारियों से जुड़े कई स्तरों पर बदलाव करने हैं।
टाटा संस की FY2026 रिपोर्ट में एयर इंडिया में कंपनी का निवेश 22,618 करोड़ रुपये पर स्थिर बताया गया है। यह पिछले साल के स्तर के बराबर है। इससे FY2026 के दौरान एयर इंडिया में नई इक्विटी नहीं डाले जाने का संकेत मिलता है।
रिपोर्ट के अनुसार, जून में टाटा संस के बोर्ड की बैठक में एयर इंडिया की फंडिंग जरूरतों पर भी चर्चा हुई थी। एयर इंडिया और टाटा संस ने इस संबंध में पूछे गए सवालों का जवाब नहीं दिया।
FY2026 में एयर इंडिया को 22,238 करोड़ रुपये का घाटा
एयर इंडिया के सामने सबसे बड़ी चुनौती उसका बढ़ता घाटा भी है। कंपनी को वित्त वर्ष 2026 में 22,238 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। यह पिछले साल के मुकाबले दोगुने से भी ज्यादा बताया गया है।
टाटा ग्रुप की कंपनियों में एयर इंडिया को इस अवधि में सबसे ज्यादा घाटा होने की बात रिपोर्ट में सामने आई है। ऐसे में नई इक्विटी पूंजी की मांग एयरलाइन के पुनर्गठन और विस्तार की जरूरतों के बीच आई है।
एयर इंडिया की फंडिंग जरूरत ऐसे समय सामने आई है जब टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन फरवरी 2027 में अपना पद छोड़ने की तैयारी कर रहे हैं।
एयर इंडिया को पटरी पर लाने में लग सकता है एक दशक
टाटा संस के बोर्ड के सामने एयर इंडिया को दोबारा मजबूत बनाने की रणनीति, कैपिटल एक्सपेंडिचर और एयरलाइन के ऑपरेशन व फ्लीट विस्तार के लिए जरूरी इक्विटी निवेश पर चर्चा हुई है।
एन. चंद्रशेखरन ने FY2026 की रिपोर्ट में कहा है कि एयर इंडिया को पूरी तरह पटरी पर लाने में एक दशक तक का समय लग सकता है।
उन्होंने इसके पीछे कई साल से चली आ रही सप्लाई-चेन की समस्याओं, पुराने सिस्टम और एयरलाइन के कामकाज के तरीके में बदलाव की जरूरत का उल्लेख किया। फ्लीट में भी बड़े स्तर पर बदलाव की जरूरत है।
इसके अलावा एयर इंडिया को टेक्निकल विशेषज्ञों और एयरलाइन प्रोफेशनल्स की बड़ी टीम तैयार करनी है। इन सभी बदलावों के लिए लगातार पूंजी की जरूरत पड़ रही है।
सैकड़ों विमानों के ऑर्डर और डिलीवरी की चुनौती
एयर इंडिया ने एयरबस और बोइंग से सैकड़ों विमानों के ऑर्डर दिए हुए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, बढ़ते वित्तीय दबाव को देखते हुए एयरलाइन ने इन विमानों की डिलीवरी टालने की कोशिश भी की है।
एयरलाइन के लिए एक तरफ फ्लीट को आधुनिक बनाना जरूरी है, वहीं दूसरी तरफ इसके लिए बड़ी पूंजी की जरूरत है। इसी वजह से शेयरधारकों से मांगी गई 1.5 अरब डॉलर की रकम को एयर इंडिया के मौजूदा बदलाव और विस्तार कार्यक्रम के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
