दिल्ली प्रदर्शन: सुप्रीम कोर्ट में वकीलों पर भड़के CJI, कहा- कोर्ट को मछली बाजार न बनाएं

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दिल्ली में इंडिया गठबंधन और कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन से जुड़े मामलों को लेकर मंगलवार (3 नवंबर) को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने याचिकाकर्ता पक्ष के वकील को जमकर फटकार लगाई। वकील बार-बार कार्यवाही में रोकटोक कर रहे थे, जिस पर नाराजगी जताते हुए सीजेआई ने कहा कि क्या कोर्ट को मछली बाजार समझ रखा है और इस तरह का आचरण बिल्कुल नहीं चलेगा। इसके साथ ही कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को हिदायत दी कि एक जैसी मिलती-जुलती याचिकाएं दाखिल न की जाएं, क्योंकि इससे सुनवाई में मुश्किलें आती हैं।

सॉलिसिटर जनरल और व्यापारियों का पक्ष
सरकार की तरफ से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि सभी पहलुओं पर अलग-अलग जवाब तैयार कर लिए गए हैं और इन्हें दाखिल किया जा रहा है। उन्होंने दलील दी कि जुलाई में एक दिन की अनुमति लेकर 17 दिन तक धरने पर बैठ गए और फिर संसद मार्च का आह्वान कर दिया गया। सार्वजनिक जगहों पर प्रदर्शन करने वाले लोग निजता का हवाला दे रहे हैं, लेकिन इस तरह तो सीसीटीवी कैमरे भी बंद करने की मांग उठ सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सिर्फ कैप्चर की गई तस्वीरों के आधार पर किसी की पहचान के चलते मुकदमा दर्ज नहीं किया जाता।

दूसरी ओर, व्यापार संगठनों की ओर से वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने पक्ष रखते हुए कहा कि इस स्थिति की वजह से भारी नुकसान हो रहा है और इस पर जल्द कुछ किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि रामलीला मैदान के आसपास थोक बाजार स्थित हैं, जहां रोजाना लाखों लोगों को रोजगार मिलता है।

प्रशांत भूषण की दलीलें और विरोध का अधिकार
याचिकाकर्ता पक्ष की तरफ से पेश हुए प्रशांत भूषण ने अदालत में कहा कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा लोगों की तस्वीरें और वीडियो कैप्चर करने के खिलाफ भी नोटिस जारी किया जाना चाहिए, क्योंकि यह सीधे तौर पर निजता का हनन है। उन्होंने तर्क दिया कि विरोध जताना एक मौलिक अधिकार है और जिस भी जगह को प्रदर्शन स्थल बनाया जाएगा, वहां कोई न कोई व्यापार या गतिविधि तो होगी ही, जिसे आधार बनाकर प्रदर्शनों को रोका नहीं जा सकता।