‘बहन जी, आप बार-बार मेरी परीक्षा क्यों लेती हैं?’ मायावती से हुई बातचीत का जिक्र कर भावुक हुए आकाश आनंद
बहुजन समाज पार्टी (BSP) के राष्ट्रीय संयोजक और मायावती के उत्तराधिकारी आकाश आनंद ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में आयोजित एक जनसभा के दौरान एक बेहद भावुक प्रसंग साझा किया। मंच से पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए आकाश ने बताया कि पार्टी में वापसी के बाद जब उन्हें बसपा सुप्रीमो मायावती के सामने अपनी बात रखने का मौका मिला, तो उन्होंने अपनी बुआ से सीधा सवाल पूछ लिया था- “बहन जी, आप बार-बार मेरी ऐसी परीक्षा क्यों लेती हैं?”
‘क्या बाबा साहेब और कांशीराम जी ने परीक्षा नहीं दी?’
आकाश आनंद ने कहा कि उनके इस सवाल पर मायावती ने जो जवाब दिया, उसे सुनकर उनकी आंखें नम हो गईं। मायावती ने उन्हें बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर और बसपा के संस्थापक मान्यवर कांशीराम के संघर्षों की याद दिलाई। मायावती ने पलटकर पूछा, “क्या बाबा साहेब ने अपनी आखिरी सांस तक समाज के लिए परीक्षा नहीं दी थी? क्या कांशीराम जी ने पूरे जीवन संघर्ष और परीक्षाएं नहीं झेलीं?”
मायावती ने आकाश को समझाया कि उन्होंने खुद अपना परिवार छोड़कर पूरे बहुजन समाज को अपना परिवार माना है और जीवन भर इसके लिए तपस्या की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इतनी बड़ी जिम्मेदारी और ‘बहुजन मिशन’ बिना कड़ी परीक्षा के किसी को नहीं सौंपा जा सकता।
‘जब तक शासक नहीं बन जाते, चैन से नहीं बैठेंगे’
बुआ और पार्टी सुप्रीमो की ये बातें सुनकर आकाश आनंद भावुक हो गए। जनसभा में उन्होंने बताया कि उन्होंने मायावती से स्पष्ट कहा है कि वह जितनी चाहें परीक्षाएं ले सकती हैं, वह जीवन भर समाज के लिए संघर्ष करने और हर कसौटी पर खरा उतरने को तैयार हैं।
मंच से कार्यकर्ताओं में जोश भरते हुए आकाश ने भरोसा दिलाया कि बहुजन समाज ही उनका असली परिवार है और जब तक बहुजन समाज देश का शासक नहीं बन जाता, तब तक वह चैन से नहीं बैठेंगे। उन्होंने फिर से मौका देने और कार्यकर्ताओं के बीच भेजने के लिए सिर झुकाकर मायावती के प्रति आभार भी व्यक्त किया।
उतार-चढ़ाव भरी रही है राजनीतिक यात्रा
लंदन के प्रतिष्ठित बिजनेस स्कूल से एमबीए कर चुके आकाश आनंद, मायावती के छोटे भाई आनंद कुमार के बेटे हैं। 2017 में राजनीति में कदम रखने वाले आकाश को 2023 के अंत में मायावती ने अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी घोषित किया था। हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान आक्रामक बयानों और दर्ज मुकदमों के बाद मायावती ने ‘राजनीतिक परिपक्वता’ का हवाला देते हुए उन्हें कुछ समय के लिए पार्टी पदों से हटा दिया था। संगठन की मांग को देखते हुए जल्द ही उन्हें फिर से राष्ट्रीय संयोजक नियुक्त कर मैदान में उतार दिया गया।
