फतेहपुर की 6 विधानसभा सीटों का सियासी गणित, क्या BJP बचा पाएगी अपना गढ़ या SP मारेगी बाजी?
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर फतेहपुर जिले में सियासी हलचल तेज हो गई है। कानपुर और प्रयागराज के बीच स्थित यह जिला राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक लिहाज से अहम माना जाता है। जिले की छह विधानसभा सीटों—जहानाबाद, बिंदकी, फतेहपुर सदर, अयाह शाह, हुसैनगंज और खागा (आरक्षित)—पर अलग-अलग सामाजिक समीकरण और स्थानीय मुद्दे चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकते हैं।
2022 के नतीजे: तीन पर BJP, दो पर SP और एक पर अपना दल (S)
2022 के विधानसभा चुनाव में फतेहपुर में किसी एक पार्टी का एकतरफा दबदबा नहीं दिखा था। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने तीन सीटों (जहानाबाद, अयाह शाह, खागा) पर जीत दर्ज की थी, जबकि समाजवादी पार्टी (SP) को दो सीटों (फतेहपुर सदर, हुसैनगंज) पर सफलता मिली। वहीं, भाजपा की सहयोगी अपना दल (एस) ने बिंदकी सीट पर कब्जा जमाया था।
फतेहपुर जिले की 6 सीटों के 2022 के परिणाम:
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जहानाबाद: राजेंद्र सिंह पटेल (BJP) ने 18,192 वोटों से जीत दर्ज की।
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बिंदकी: जय कुमार सिंह जैकी (अपना दल-एस) ने 3,797 वोटों से जीत दर्ज की।
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फतेहपुर सदर: चंद्र प्रकाश (SP) ने 8,601 वोटों से जीत दर्ज की।
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अयाह शाह: विकास गुप्ता (BJP) ने 13,006 वोटों से जीत दर्ज की।
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हुसैनगंज: ऊषा मौर्य (SP) ने 25,181 वोटों से जीत दर्ज की।
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खागा (आरक्षित): कृष्णा पासवान (BJP) ने 5,509 वोटों से जीत दर्ज की।
क्या हैं 2027 के लिए प्रमुख चुनौतियां?
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि बिंदकी, खागा और फतेहपुर सदर में मुकाबला काफी करीबी रहा था, जबकि हुसैनगंज में सपा ने बड़े अंतर से जीत हासिल की थी।
1. जहानाबाद और अयाह शाह: भाजपा के सामने सीट बचाने की चुनौती जहानाबाद और अयाह शाह में भाजपा को जीत मिली थी। 2027 में भाजपा के लिए संगठन को मजबूत करना और केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओं के लाभार्थियों तक पहुंच बनाए रखना महत्वपूर्ण होगा। सपा को यहां पिछले चुनाव में हुए नुकसान की भरपाई करनी होगी।
2. बिंदकी: गठबंधन की अहम परीक्षा बिंदकी में अपना दल (एस) और सपा के बीच काफी नजदीकी मुकाबला था। 2027 में भाजपा और अपना दल (एस) के बीच सीट बंटवारे और तालमेल का असर यहां साफ नजर आएगा। वहीं, सपा को वापसी के लिए स्थानीय असंतोष का फायदा उठाना होगा।
3. फतेहपुर सदर और हुसैनगंज: सपा का मजबूत गढ़ फतेहपुर सदर में सपा और भाजपा के बीच सीधी लड़ाई थी, जिसमें सपा विजयी रही। वहीं, हुसैनगंज सपा के लिए जिले की सबसे मजबूत सीट साबित हुई, जहां जीत का अंतर 25 हजार से ज्यादा था। 2027 में सपा के लिए इस बढ़त को बरकरार रखना चुनौती होगी, जबकि भाजपा को अपनी पिछली हार का बारीकी से विश्लेषण करना होगा।
4. खागा (आरक्षित सीट): कड़ा होगा मुकाबला अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित खागा सीट पर भाजपा ने करीब 5,500 वोटों के अंतर से जीत हासिल की थी। यह कम अंतर बताता है कि दोनों प्रमुख दलों के बीच यहां मुकाबला तगड़ा रहने वाला है।
क्या होगी पार्टियों की रणनीति? 2027 के चुनाव में भाजपा का फोकस मौजूदा विधायकों के कामकाज, बूथ प्रबंधन और लाभार्थी संपर्क पर होगा। वहीं, समाजवादी पार्टी ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) फॉर्मूले को धार देने की कोशिश करेगी।
इस लड़ाई में बहुजन समाज पार्टी (BSP) और कांग्रेस (Congress) की भूमिका को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। 2022 में बसपा कोई सीट नहीं जीत पाई थी, लेकिन उसने सभी सीटों पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई थी। खागा जैसी आरक्षित सीटों पर बसपा के प्रदर्शन पर खास नजर रहेगी।
