मंत्री और अफसरों की खींचतान में अटकी 72 करोड़ की फाइल, 16 साल पुराने टूटे-फूटे बर्तनों में मिड-डे मील खाने को मजबूर लाखों बच्चे
राजस्थान के 53,738 सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों बच्चों की थाली अब सियासत और अफसरशाही की लड़ाई का शिकार हो रही है। मध्याह्न भोजन (मिड-डे मील) पकाने और परोसने के लिए नए बर्तन खरीदने का 72 करोड़ रुपये का बजट महीनों पहले मंजूर हो चुका है, लेकिन शिक्षा विभाग में चल रही खींचतान के चलते यह फाइल ठंडे बस्ते में पड़ी है।
16 साल पुराने बर्तनों में परोसा जा रहा खाना
प्रदेश के सरकारी स्कूलों में फिलहाल जिन बर्तनों का इस्तेमाल हो रहा है, उनकी खरीद 2009 में हुई थी। 16 साल पुराने इन बर्तनों की हालत अब बेहद खस्ता है। कई स्कूलों में पतीलों में छेद हो गए हैं और थालियां मुड़ चुकी हैं या टूट गई हैं। कुछ जगहों पर हालत इतनी खराब है कि एक ही थाली में दो बच्चों को खाना खिलाना पड़ रहा है। शिक्षक भी इस बात को स्वीकार करते हैं कि इन हालात में बच्चों को साफ-सुथरा खाना परोसना मुश्किल हो गया है।
क्या है मंत्री और अधिकारियों के बीच विवाद की जड़?
बर्तन खरीद की फाइल शिक्षा मंत्री और विभागीय अधिकारियों की अलग-अलग सोच के कारण अटकी हुई है। शिक्षा मंत्री मदन दिलावर चाहते हैं कि बर्तन खरीद का अधिकार सीधे स्कूलों (SMC/SDMC) को सौंप दिया जाए, ताकि वे अपनी जरूरत के हिसाब से तुरंत खरीद कर सकें।
दूसरी तरफ, शिक्षा विभाग के अधिकारी इसके पक्ष में नहीं हैं। उनका तर्क है कि खरीद की व्यवस्था केंद्रीकृत (Centralized) होनी चाहिए, यानी विभाग एक साथ सभी स्कूलों के लिए बर्तन खरीदे। अधिकारियों का मानना है कि इससे पूरे प्रदेश में एक जैसे बर्तनों की आपूर्ति होगी और गुणवत्ता भी सुनिश्चित की जा सकेगी। इस टकराव के कारण, मंत्री के निर्देशों के बावजूद जमीन पर खरीद प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई है।
सरकार ने कैसे तय किया है 72 करोड़ का बजट?
नए बर्तनों की खरीद के लिए कुल 71 करोड़ 90 लाख 90 हजार रुपये का बजट मंजूर किया गया है। इस राशि में 43 करोड़ 14 लाख 54 हजार रुपये (60%) केंद्र सरकार वहन करेगी, जबकि 28 करोड़ 76 लाख 36 हजार रुपये (40%) राज्य सरकार का हिस्सा है।
इस योजना के तहत स्कूलों को उनकी छात्र संख्या के आधार पर बजट आवंटित किया जाना है:
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50 तक छात्र वाले 25,476 स्कूल: ₹10,000 प्रति स्कूल
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150 तक छात्र वाले 21,412 स्कूल: ₹15,000 प्रति स्कूल
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250 तक छात्र वाले 5,620 स्कूल: ₹20,000 प्रति स्कूल
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251 से अधिक छात्र वाले 1,230 स्कूल: ₹25,000 प्रति स्कूल
बजट तैयार होने के बावजूद, खरीद का तरीका तय न होने से यह पूरी योजना फाइलों में उलझी हुई है और इसका सीधा खामियाजा सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले मासूम बच्चों को भुगतना पड़ रहा है।
