बिहार के स्कूलों में मिड डे मील में भारी लापरवाही: शिक्षा विभाग सख्त, 30 जिलों के DPO से मांगा जवाब
बिहार के सरकारी स्कूलों में मिड डे मील (मध्याह्न भोजन) योजना के संचालन में बड़ी लापरवाही सामने आई है। ई-शिक्षाकोष पोर्टल के आंकड़ों की समीक्षा के बाद शिक्षा विभाग ने कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य के 30 जिलों के जिला कार्यक्रम पदाधिकारियों (DPO) से स्पष्टीकरण मांगा है। शिक्षा विभाग के निदेशक विनायक मिश्रा ने इस संबंध में आदेश जारी कर अधिकारियों को दो दिनों के भीतर अपना जवाब सौंपने का निर्देश दिया है।
समीक्षा बैठक में खुली लापरवाही की पोल
शिक्षा विभाग ने 22 अक्टूबर तक के आंकड़ों को आधार बनाकर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मिड डे मील योजना की समीक्षा की थी। इस बैठक में योजना के संचालन की स्थिति बेहद असंतोषजनक पाई गई। ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों के अनुसार, राज्य के कई जिलों में 85 फीसदी या उससे भी कम स्कूलों में बच्चों को मध्याह्न भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। इस खुलासे के बाद विभाग ने सीधे संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
दो दिन का अल्टीमेटम, कार्रवाई की चेतावनी
विभाग ने सभी संबंधित DPO को नोटिस जारी कर दो दिनों के भीतर स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। इसके साथ ही अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने प्रभार वाले सभी सरकारी स्कूलों में योजना का नियमित संचालन सुनिश्चित कराएं। शिक्षा विभाग ने साफ किया है कि योजना का मुख्य उद्देश्य बच्चों को पौष्टिक भोजन देना है और इसमें किसी भी स्तर पर होने वाली लापरवाही पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
भोजन परोसने से पहले करनी होगी गुणवत्ता की जांच
स्कूलों में बंटने वाले भोजन की गुणवत्ता पर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। अरवल समेत कुछ अन्य जिलों से चावल, दाल, तेल और मसालों की खराब गुणवत्ता की शिकायतें विभाग तक पहुंची थीं। इसे देखते हुए विभाग ने खाद्य सामग्री की गुणवत्ता और उसकी एक्सपायरी डेट की अनिवार्य जांच के निर्देश दिए हैं। नए आदेश के तहत, बच्चों को खाना परोसने से पहले स्कूल के रसोइया, प्रधानाध्यापक और शिक्षकों को खुद भोजन चखकर उसकी गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी।
