BJP के सामने सहयोगियों की चुनौती, NDA में सीट शेयरिंग पर रस्साकशी शुरू
उत्तर प्रदेश में जैसे-जैसे 2027 के विधानसभा चुनाव का समय करीब आ रहा है, राजनीतिक दलों ने अपना दम दिखाना शुरू कर दिया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में सीट बंटवारे को लेकर सहयोगी दलों ने अभी से दबाव बनाना तेज कर दिया है।
अपना दल (सोनेलाल), निषाद पार्टी, राष्ट्रीय लोकदल (RLD) और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) अपनी राजनीतिक ताकत के आधार पर ज्यादा सीटें हासिल करने की कोशिश में हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में जहां अपना दल (एस) और निषाद पार्टी बीजेपी के साथ थे, वहीं RLD और सुभासपा समाजवादी पार्टी गठबंधन का हिस्सा थे। अब इन चारों दलों के एनडीए में होने से आगामी चुनाव में सीटों का गणित पहले से ज्यादा जटिल होने की संभावना है।
अपना दल (एस) की नजर 30 से 35 सीटों पर
केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल के नेतृत्व वाले अपना दल (एस) ने 2022 में बीजेपी के साथ 18 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 12 पर जीत हासिल की थी। इस बार पार्टी अपना दायरा बढ़ाने की तैयारी में है और उसकी नजर 30 से 35 विधानसभा सीटों पर बताई जा रही है। अनुप्रिया पटेल सार्वजनिक तौर पर भी पार्टी के विस्तार की बात कह चुकी हैं। अपनी ताकत दिखाने के लिए उन्होंने हाल ही में लखनऊ, सोनभद्र, मऊ और घाटमपुर में कार्यकर्ता सम्मेलन किए हैं। इसके अलावा 2 नवंबर को पार्टी का राष्ट्रीय सम्मेलन भी प्रस्तावित है।
निषाद पार्टी का आरक्षण कार्ड और दबाव की राजनीति
निषाद पार्टी ने 2022 में 16 सीटों पर चुनाव लड़ा था। इनमें से 10 सीटों पर उनके अपने सिंबल और 6 पर बीजेपी के सिंबल से उम्मीदवार उतारे गए थे। अब पार्टी अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद निषाद समाज को अनुसूचित जाति (SC) श्रेणी में आरक्षण देने की मांग उठा रहे हैं। इसे चुनाव में ज्यादा सीटें झटकने की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। हाल ही में 21 अक्टूबर को दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में आयोजित ‘दिल्ली चलो’ सम्मेलन में उन्होंने बीजेपी से इस मुद्दे पर जल्द फैसला लेने की अपील की है।
RLD की पश्चिमी यूपी और उसके पार विस्तार की रणनीति
जयंत चौधरी की राष्ट्रीय लोकदल भी एनडीए में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की पूरी कोशिश में है। 2022 में सपा गठबंधन के साथ पार्टी को 33 सीटें मिली थीं, जिनमें उसने 8 पर जीत दर्ज की थी। इस बार रालोद की नजर सिर्फ पश्चिमी यूपी तक सीमित नहीं है, बल्कि वह आगरा, अलीगढ़, मथुरा और हाथरस जैसे क्षेत्रों में भी सीटें मांग रही है। जयंत चौधरी द्वारा आगरा के किरावली में आयोजित बड़ी रैली को संगठन के विस्तार के रूप में देखा जा रहा है।
सुभासपा की पूर्वांचल पर नजर
दूसरी ओर, ओमप्रकाश राजभर की सुभासपा भी पूर्वांचल में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए ज्यादा सीटों की मांग कर सकती है। सहयोगी दलों की इन बढ़ती महत्वाकांक्षाओं के कारण बीजेपी को क्षेत्रीय समीकरणों, जीत की संभावनाओं और सहयोगियों की मांगों के बीच कड़ा संतुलन बनाना होगा। चुनाव से पहले सीटों का यह बंटवारा एनडीए की एकजुटता की बड़ी परीक्षा साबित हो सकता है।
