शिक्षा का मकसद सिर्फ पैसा कमाना रह गया, सड़कों पर उतरे ‘GenZ’ को अपना लक्ष्य नहीं पता: राजेंद्र अर्लेकर

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तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर ने देश की मौजूदा शिक्षा व्यवस्था और युवाओं के प्रदर्शनों को लेकर कड़ी टिप्पणी की है। महाराष्ट्र के पुणे में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आज शिक्षा का मुख्य उद्देश्य केवल पैसा कमाना रह गया है। इसके साथ ही उन्होंने सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे जेनजी (GenZ) छात्रों पर निशाना साधते हुए उन्हें समाज सेवा की नसीहत दी।

‘पैसा कमाना नहीं, अच्छा इंसान बनना हो मकसद’

शिक्षा के गिरते स्तर पर बात करते हुए अर्लेकर ने कहा कि नई पीढ़ी को सही बातें सिखाई ही नहीं जा रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह इसके लिए बच्चों को दोष नहीं देते। उनके मुताबिक, वर्तमान शिक्षा व्यवस्था सिर्फ धन जुटाने और एक अच्छा बिजनेसमैन बनने पर केंद्रित हो गई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि शिक्षा का असली मकसद एक अच्छा इंसान बनना होना चाहिए, क्योंकि पैसा तो कोई भी कमा सकता है।

बिना लक्ष्य के सड़कों पर है ‘जेनजी’

युवाओं के हालिया विरोध प्रदर्शनों पर टिप्पणी करते हुए राज्यपाल ने कहा कि जो युवा खुद को जेनजी कहते हैं, वे बिना किसी स्पष्ट उद्देश्य के सड़कों पर उतर आए हैं। अर्लेकर के अनुसार, ये छात्र व्यवस्था में बदलाव तो चाहते हैं, लेकिन उन्हें यह नहीं पता कि बदलाव के बाद क्या करना है। उनका मानना है कि जब तक युवा समाज की सेवा करना और जरूरतमंदों की मदद करना नहीं सीखेंगे, तब तक सिर्फ सड़कों पर रहने से कोई वास्तविक बदलाव नहीं आएगा।

‘दिशा हमें खुद तय करनी होगी’

समाज के प्रति जिम्मेदारी का जिक्र करते हुए अर्लेकर ने कहा कि आज के समय में बेहतर इन्फ्रास्ट्रक्चर मौजूद है और कई पूंजीपति सीएसआर (CSR) फंड के जरिए मदद भी कर रहे हैं। उन्होंने साफ किया कि कोई बाहर से आकर हमें रास्ता नहीं दिखाएगा। जब तक शिक्षण संस्थानों के वास्तविक लक्ष्य तय नहीं होंगे और लोग समाज के लिए काम करने की पहल नहीं करेंगे, तब तक इन संसाधनों का सही इस्तेमाल नहीं हो पाएगा।