7 नवंबर को अयोध्या में सजेगा भव्य दीपोत्सव: 2100 स्वदेशी ड्रोन और लेजर शो का होगा आकर्षण, CM योगी ने दिए निर्देश

Ayodhya-News

उत्तर प्रदेश के अयोध्या में आगामी 7 नवंबर को होने वाले दीपोत्सव को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस आयोजन को सनातन चेतना, जनआस्था और वैश्विक गौरव के महापर्व के रूप में मनाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने समीक्षा के दौरान अधिकारियों को स्पष्ट किया कि आयोजन में आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा, सुविधा और सुगम आवागमन के इंतजाम पूरी तरह से पुख्ता होने चाहिए।

2100 स्वदेशी ड्रोन और भव्य सरयू आरती

इस बार राम की पैड़ी और संपूर्ण अवधपुरी में दीप प्रज्ज्वलन के साथ कई बड़े आकर्षण जोड़े गए हैं। 2100 स्वदेशी ड्रोनों की मदद से आसमान में रामायण आधारित शो प्रस्तुत किया जाएगा। लेजर शो और हरित आतिशबाजी (green fireworks) आयोजन का मुख्य हिस्सा होंगे। सरयू घाट पर होने वाली दिव्य आरती में इस बार 2147 प्रतिभागी एक साथ हिस्सा लेंगे। राम की पैड़ी पर 200 कलाकार विशेष सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देंगे।

12 देशों के मेहमान और 35 हजार स्वयंसेवक

दीपोत्सव में देश-विदेश की भागीदारी सुनिश्चित की गई है। 12 देशों के सांस्कृतिक प्रतिनिधि और विदेशी राजनयिक इस आयोजन के साक्षी बनेंगे। इसके अलावा भारत के 13 राज्यों से लगभग 1000 कलाकार अयोध्या पहुंच रहे हैं, जो अपनी लोककला और नृत्य प्रस्तुत करेंगे। पूरे कार्यक्रम के प्रबंधन के लिए करीब 35 हजार स्वयंसेवक सहभागी रहेंगे। सरकार ने डिजिटल माध्यम से इस पूरे आयोजन को 5 करोड़ लोगों तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।

साकेत महाविद्यालय से निकलेगी शोभायात्रा

आयोजन के तहत साकेत महाविद्यालय से रामायण आधारित विशेष शोभायात्रा निकाली जाएगी। वहीं, रामकथा पार्क में भरत मिलाप और श्रीराम के राज्याभिषेक का आयोजन रखा गया है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि सभी कार्यक्रम दीपोत्सव की धार्मिक गरिमा और सांस्कृतिक परंपरा के पूरी तरह अनुरूप होने चाहिए।

वाल्मीकि जयंती और चित्रकूट रामघाट का विकास

मुख्यमंत्री ने 26 अक्टूबर को महर्षि वाल्मीकि जयंती के कार्यक्रमों की भी रूपरेखा तय की है। इस मौके पर प्रदेश के सभी जिलों में रामायण पाठ और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। मंदिरों में वाल्मीकि रामायण का अखंड पाठ होगा।

इसके साथ ही राज्य सरकार ने चित्रकूट के रामघाट के व्यवस्थित विकास पर भी फोकस किया है। इसमें बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्विकास को प्राथमिकता दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि रामघाट पर दुकानों का व्यवस्थित पुनर्वास हो और नालों का सुदृढ़ीकरण किया जाए। भविष्य में बाढ़ की आशंका को देखते हुए निर्माण कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित करने और इसके धार्मिक-ऐतिहासिक महत्व को बनाए रखने पर जोर दिया गया है।