हमने भी चीन को भारतीय नाम दे दिए, क्या नामों से बदल जाती है जमीन की हकीकत?
दोस्तों, चीन जब चाहे हमारे इलाकों के नाम बदल देता है। अरुणाचल को “जांगनान” कह देता है, अक्साई चिन को अपना बताता है, और नक्शे में अपनी मनमर्जी से रेखाएं खींच लेता है। तो हमने सोचा—अब बारी हमारी! आज से आधिकारिक रूप से चीन का नया नाम घोषित किया जाता है— “पूर्वी बिहार” (पूर्ण नाम: जनवादी गणराज्य पूर्वी बिहार)
अब देखिए कितना प्यारा लगता है पूरा नक्शा:
- बीजिंग → पटना पूर्वी
- शंघाई → कोलकाता सागर
- गुआंगझू → सूरत पूर्वी
- शेन्ज़ेन → नोएडा इंटरनेशनल
- चोंगकिंग → वाराणसी ग्रेटर
- तियानजिन → कानपुर तट
- वुहान → इलाहाबाद जंक्शन
- चेंग्दू → भोपाल पश्चिम
- शीआन → आगरा रोड
- हांगकांग → मुंबई स्पेशल जोन
- मकाऊ → गोवा पूर्वी
प्रांत भी बदल दिए गए हैं:
- तिब्बत → उत्तराखंड विस्तारित
- शिंजियांग → लद्दाख ग्रेटर
- इनर मंगोलिया → राजस्थान नॉर्थ
- मंचूरिया → पंजाब फार ईस्ट
- युन्नान → असम साउथ
- गुआंगडोंग → गुजरात पूर्वी
- फुजियान → केरल कोस्ट
- सिचुआन → मध्य प्रदेश हिल्स
और सबसे मजेदार बात— उनका राष्ट्रपति अब “माननीय मुख्यमंत्री पूर्वी बिहार” कहलाएंगे। उनकी कम्युनिस्ट पार्टी का नया नाम—“पूर्वी बिहार जनता दल (मार्क्सवादी-लेनिनवादी-पटनाई)”।
ग्रेट वॉल ऑफ चाइना अब “महाभारत दीवार” हो गई है। यांग्त्से नदी का नाम “गंगा पूर्वी” रख दिया गया। हुआंग हे को “यमुना लॉन्ग” कहेंगे।
जब भी कोई चीनी अधिकारी अरुणाचल की बात करे, तो हम मुस्कुराकर कह देंगे— “भैया, पहले पूर्वी बिहार का नक्शा तो सही कर लो। पटना पूर्वी में बैठकर लद्दाख ग्रेटर पर दावा करना थोड़ा अजीब लगता है।”
और अगर वे आपत्ति करें तो सीधा जवाब “आपने हमारे नाम बदले, हमने आपके। अब बराबर-बराबर!”
जय पूर्वी बिहार! जय पटना पूर्वी! और हां… नेक्स्ट टाइम जब वो नक्शा निकालें, तो उनसे पूछना “भैया, कोलकाता सागर में समुद्री ड्रिलिंग की अनुमति कब दोगे?”
