H-1B वीजा धारकों को ‘बंधुआ मजदूर’ बताने पर घिरे जेडी वेंस, सफाई में बोले- विदेशी कामगार नहीं, कॉरपोरेट कंपनियां हैं असली समस्या
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने H-1B वीजा धारक कर्मचारियों को ‘बंधुआ मजदूर’ (Indentured Servants) कहने वाले अपने विवादास्पद बयान का दृढ़ता से बचाव किया है। मिशिगन राज्य के फ्लैट रॉक में सीबीएस (CBS) न्यूज़ द्वारा आयोजित एक टाउन हॉल कार्यक्रम में वेंस ने स्पष्ट किया कि उनका निशाना विदेशी कामगार नहीं हैं। उन्होंने बड़ी अमेरिकी कॉरपोरेट कंपनियों पर मुनाफे के लिए इस वीजा प्रणाली का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया।
कॉरपोरेट कंपनियों के हाथ में है असीमित ताकत
वेंस ने H-1B वीजा प्रणाली की खामियों का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें विदेशी कर्मचारियों की कानूनी स्थिति और अमेरिका में रहने का अधिकार पूरी तरह से उनके नियोक्ता (Employer) पर निर्भर करता है। उन्होंने इस मजबूरी को ‘बंधुआ मजदूरी’ के समकक्ष रखते हुए तर्क दिया कि इस व्यवस्था ने नियोक्ताओं को असीमित और अनुचित ताकत दे दी है।
उनके मुताबिक, यदि कोई H-1B वीजा धारक खराब कार्य स्थितियों का विरोध करता है या वेतन वृद्धि की मांग करता है, तो उसे नौकरी गंवाने के साथ-साथ अमेरिका से निर्वासित (Deport) होने का भी खतरा रहता है। नौकरी छिनने पर नया प्रायोजक खोजने के लिए सीमित समय होता है, जो विदेशी कर्मचारियों को अपने नियोक्ताओं के अधीन रहने पर मजबूर कर देता है।
अमेरिकी नागरिकों की छंटनी पर चिंता
आव्रजन नीति के आर्थिक प्रभावों पर बात करते हुए वेंस ने कहा कि मौजूदा व्यवस्था अमेरिकी नागरिकों के लिए भी बेहद नुकसानदेह है। कंपनियां लागत में कटौती और अधिक मुनाफा कमाने के लिए योग्य अमेरिकी कर्मचारियों को निकाल देती हैं और उनकी जगह H-1B वीजा पर आए विदेशी कामगारों को रख लेती हैं, जिनसे कम वेतन और अधिक दबाव में काम कराया जा सकता है। वेंस ने दावा किया कि असली समस्या बेहतर जीवन की तलाश में आने वाले प्रवासी नहीं हैं, बल्कि वह दोषपूर्ण अमेरिकी वीजा प्रणाली है जो कॉरपोरेट जगत को शोषण की कानूनी छूट देती है।
‘सास-ससुर दक्षिण भारत से आए’, पत्नी की भारतीय विरासत का जिक्र
खुद पर लग रहे प्रवासी-विरोधी आरोपों का जवाब देते हुए जेडी वेंस ने अपनी पत्नी उषा चिलुकुरी वेंस की भारतीय विरासत का गर्व से उल्लेख किया। उन्होंने कहा, “मैं अपनी सास और ससुर से बहुत प्यार करता हूं, जो दक्षिण भारत से आकर अमेरिका में बसे थे। उनकी बेटी, जो इसी देश में पैदा हुई, आज अमेरिका की सेकंड लेडी है।”
इस व्यक्तिगत संदर्भ के जरिए वेंस ने संदेश दिया कि वे एक ऐसी आव्रजन प्रणाली के पक्षधर हैं जो अमेरिका के विकास में योगदान देने वाले प्रतिभाशाली लोगों का स्वागत करे, लेकिन अमेरिकी कामगारों के अधिकारों के प्रति भी पूरी तरह निष्पक्ष हो।
ग्रीन कार्ड प्रमाणन से कई IT कंपनियां निलंबित
अमेरिकी प्रशासन आव्रजन और विदेशी श्रम को लेकर लगातार कड़े कदम उठा रहा है। हाल ही में सरकार ने कई प्रमुख आईटी फर्मों (जिनमें भारतीय कंपनियां भी शामिल हैं) को उस विशेष रोजगार प्रमाणन कार्यक्रम से निलंबित कर दिया है, जिसके जरिए विदेशी कामगार स्थायी निवास या ‘ग्रीन कार्ड’ के लिए आवेदन करते हैं।
अमेरिकी सरकार और नीति निर्माताओं का तर्क है कि इस व्यवस्था ने स्थानीय श्रम बाजार को असंतुलित कर दिया है। वेंस का यह रुख संकेत देता है कि आने वाले समय में इमिग्रेशन और विदेशी वर्कफोर्स को लेकर ‘अमेरिका फर्स्ट’ की नीति के तहत और सख्त फैसले लिए जा सकते हैं।
