ब्रिटेन ने 109 साल पुराना कर्ज चुकाने से किया इनकार, MP के रूठिया परिवार ने भेजा था नोटिस
प्रथम विश्व युद्ध (1917) के दौरान ब्रिटिश सरकार को दिया गया 35,000 रुपये का कर्ज अब चर्चा का विषय बन गया है। मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के रूठिया परिवार का दावा है कि ब्रिटेन की सरकार ने 109 साल पुराने इस कर्ज को चुकाने से साफ इनकार कर दिया है। ब्याज के साथ यह रकम अब एक करोड़ रुपये से अधिक हो चुकी है। कर्ज वसूली के लिए परिवार ने ब्रिटिश सरकार को लीगल नोटिस भेजा था, जिसका जवाब अब सामने आया है।
लोन मैनेजमेंट ऑफिस का जवाब: कोई रिकॉर्ड नहीं
ब्रिटेन के लोन मैनेजमेंट ऑफिस ने ईमेल के जरिए लीगल नोटिस का जवाब दिया है। ब्रिटिश सरकार का कहना है कि उनके पास इस कर्ज से जुड़ा कोई आधिकारिक रिकॉर्ड या सबूत मौजूद नहीं है। इससे पहले, 3 अगस्त को भेजे गए ईमेल में ब्रिटेन ने परिवार से कर्ज से जुड़े दस्तावेज, शर्तें और प्रमाण पत्र पेश करने को कहा था। इसके जवाब में विनय रूठिया ने पॉलिटिकल एजेंसी के हस्ताक्षर वाले दस्तावेज और सर्टिफाइड रिकॉर्ड भी भेजे, लेकिन ब्रिटिश अधिकारियों ने इन दस्तावेजों को अपने रिकॉर्ड में न होने का हवाला देकर लोन से पल्ला झाड़ लिया।
क्या है 1917 के कर्ज का पूरा मामला
रूठिया परिवार के वंशज विनय रूठिया के अनुसार, उनके पूर्वज सेठ जुम्मा लाल रूठिया ने 1917 में पहले विश्व युद्ध के समय भोपाल रियासत के प्रशासनिक कामकाज के लिए ब्रिटिश सरकार को 35,000 रुपये का कर्ज दिया था। परिवार का दावा है कि आज तक यह रकम वापस नहीं दी गई। इसी बकाया राशि को वापस पाने के लिए विनय रूठिया ने अपने वकील श्रेयांश रानीवाला के माध्यम से ब्रिटेन की सरकार को कानूनी नोटिस भेजा था।
पारदर्शिता की मांग पर अड़ा परिवार
ब्रिटिश सरकार के 16 अक्टूबर 2026 को भेजे गए जवाब से विनय रूठिया असंतुष्ट हैं। उनका कहना है कि ब्रिटिश सरकार कर्ज चुकाने की कानूनी जिम्मेदारी से भाग रही है। परिवार ने मांग की है कि ब्रिटेन को इस ऐतिहासिक कर्ज की जिम्मेदारी लेनी चाहिए और इसे चुकाने के मामले में पूरी पारदर्शिता बरतनी चाहिए।
