भदोही की 3 विधानसभा सीटों का चुनावी इतिहास, जानें किसका रहा दबदबा
उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनावों को लेकर सभी राजनीतिक दलों ने जमीनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। राज्य के सियासी समीकरणों में पूर्वांचल का अहम हिस्सा और ‘कालीन नगरी’ के नाम से मशहूर भदोही जिला (संत रविदास नगर) हमेशा से महत्वपूर्ण रहा है।
भदोही जिले में कुल तीन विधानसभा सीटें आती हैं—भदोही (सामान्य), ज्ञानपुर (सामान्य) और औराई (SC आरक्षित)। इस जिले की सबसे बड़ी खासियत यह रही है कि यहां कभी भी किसी एक राजनीतिक दल का पूर्ण और स्थायी दबदबा नहीं रहा। शुरुआती दशकों में जहां कांग्रेस का वर्चस्व रहा, वहीं पिछले दो दशकों में समाजवादी पार्टी (SP), भारतीय जनता पार्टी (BJP) और बहुजन समाज पार्टी (BSP) के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली है। आइए, एक नजर डालते हैं भदोही जिले की इन तीनों सीटों के सियासी सफर और इतिहास पर।
भदोही विधानसभा सीट: सपा और भाजपा में कड़ा मुकाबला
भदोही विधानसभा सीट (सामान्य श्रेणी) 1962 के चुनाव से अस्तित्व में आई थी। बीच में कुछ समय के लिए यह अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित रही, लेकिन 2008 के परिसीमन के बाद यह फिर से सामान्य सीट बन गई।
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कांग्रेस का शुरुआती दौर: 1960 से 1980 के दशक के बीच इस सीट पर कांग्रेस का गहरा प्रभाव था। इस दौरान कांग्रेस ने तीन बार (1962, 1967, 1980) यहां से चुनाव जीता।
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मौजूदा समीकरण: 1990 के बाद यह सीट बदलती राजनीतिक हवाओं का केंद्र बन गई। इस सीट पर कांग्रेस, भाजपा, सपा (उपचुनाव सहित 4 बार), बसपा (2 बार) और अन्य दलों ने भी जीत दर्ज की है।
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हालिया चुनाव: पिछले एक दशक में यहां सपा और भाजपा के बीच मुख्य मुकाबला रहा है। 2012 में सपा के जाहिद बेग ने जीत हासिल की। 2017 में भाजपा के रवींद्र नाथ त्रिपाठी ने जाहिद बेग को मात्र 1,105 वोटों के बेहद कड़े अंतर से हराया। हालांकि, 2022 में जाहिद बेग ने वापसी करते हुए भाजपा प्रत्याशी को 4,885 वोटों से मात दी। वर्तमान में जाहिद बेग ही इस सीट से विधायक हैं। मुस्लिम, यादव, दलित और सवर्ण मतदाता यहां हार-जीत तय करते हैं।
ज्ञानपुर विधानसभा सीट: निषाद पार्टी और विजय मिश्रा का गढ़
ज्ञानपुर सीट (सामान्य) पर शुरुआती दौर में (1950 से 1980 के दशक तक) कांग्रेस का दबदबा रहा। लेकिन, पिछले दो दशकों में यह सीट बाहुबली नेता विजय मिश्रा (विजय कुमार) के नाम से जानी गई।
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विजय मिश्रा का वर्चस्व: 2002 से 2012 तक विजय मिश्रा ने समाजवादी पार्टी के टिकट पर यहां से लगातार तीन बार जीत दर्ज की। 2017 में सपा से टिकट न मिलने पर उन्होंने निषाद पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा और भाजपा के महेंद्र कुमार बिंद को 20,230 वोटों से हराया।
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निषाद पार्टी का कब्जा: 2022 के चुनाव में राजनीतिक समीकरण बदले। निषाद पार्टी (BJP गठबंधन) के उम्मीदवार विपुल दुबे ने सपा के राम किशोर बिंद को 6,231 वोटों से हराया। लंबे समय तक विधायक रहे विजय मिश्रा ने अपनी नई पार्टी (PMSP) से चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें तीसरे स्थान (करीब 16% वोट) पर संतोष करना पड़ा। इस सीट पर निषाद, बिंद और अन्य पिछड़ी जातियों का वोट सबसे निर्णायक होता है।
औराई विधानसभा सीट: सपा की कड़ी चुनौती और भाजपा का कब्जा
औराई विधानसभा सीट अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित है। इस क्षेत्र में दलित (विशेषकर पासी समाज), बिंद, यादव और सवर्ण मतदाता अच्छी खासी संख्या में हैं।
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अलग-अलग दलों का राज: 1960 से 1980 तक यहां कांग्रेस और जनता दल का प्रभाव रहा। 1990 के दशक में भाजपा के रंगनाथ मिश्रा ने यहां से दो बार जीत दर्ज की। 2002 से 2007 के बीच यह सीट बसपा के खाते में रही (रंगनाथ मिश्रा बसपा में आ गए थे)। 2012 में यहां से सपा की मधुबाला पासी ने जीत हासिल की।
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भाजपा की वापसी: 2017 से इस सीट पर भाजपा का कब्जा है। भाजपा के दीनानाथ भास्कर ने 2017 में सपा प्रत्याशी को 19,779 वोटों से हराया। 2022 का चुनाव बेहद दिलचस्प और कांटे का रहा, जहां दीनानाथ भास्कर ने सपा की अंजनी को मात्र 1,647 वोटों के मामूली अंतर से हराकर अपनी सीट बरकरार रखी।
कुल मिलाकर, कालीन नगरी भदोही का सियासी मिजाज हमेशा बदलता रहा है। आगामी चुनावों में यहां सपा और भाजपा (NDA) के बीच एक बार फिर सीधी और दिलचस्प टक्कर देखने को मिल सकती है।
