हलफनामा: CJP प्रदर्शन के दौरान नियमों की अनदेखी हुई, हिंसा में 240 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हुए

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कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध प्रदर्शन और संसद मार्च मामले में दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में अपना जवाबी हलफनामा दाखिल कर दिया है। पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार की ओर से 15 अक्टूबर 2026 को दाखिल इस हलफनामे में कहा गया है कि 20 जुलाई 2026 को हुए प्रदर्शन के दौरान गंभीर कानून-व्यवस्था की स्थिति पैदा हो गई थी, जिससे निपटने के लिए पुलिस को नियमों के तहत कार्रवाई करनी पड़ी। यह मामला शैलेंद्र मणि त्रिपाठी की याचिका और सुप्रीम कोर्ट में लंबित अवमानना कार्यवाही से जुड़ा है।

20 जुलाई के प्रदर्शन में शर्तों के उल्लंघन का आरोप

पुलिस के मुताबिक, CJP ने 17 जून को जंतर-मंतर पर 20 जून को एक दिन के धरने के लिए आवेदन दिया था, जिसमें सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक की अनुमति दी गई थी। आयोजकों ने अधिकतम 1,000 लोगों की सीमा, समय और स्थल का पालन करने तथा संसद की ओर मार्च नहीं निकालने का लिखित आश्वासन दिया था।

लेकिन पुलिस का आरोप है कि इन शर्तों का उल्लंघन करते हुए संसद सत्र के पहले दिन ‘चलो संसद’ मार्च निकाला गया और 30,000 से अधिक लोग एकत्र हो गए। भीड़ ने बैरिकेड तोड़ने और संसद भवन की ओर बढ़ने की कोशिश की।

240 से अधिक पुलिसकर्मी हुए थे घायल

हलफनामे में दावा किया गया है कि प्रदर्शन के दौरान कुछ उपद्रवियों ने पुलिसकर्मियों पर पत्थरों और डंडों से हमला किया। उनके सुरक्षा उपकरण हटाए गए और उन्हें जमीन पर गिराया गया, जिसके चलते 240 से अधिक पुलिसकर्मी और अन्य कर्मी घायल हो गए। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए लगभग 15,000 पुलिसकर्मियों (सहित 3,750 महिला कर्मी) को तैनात करना पड़ा था।

मेट्रो स्टेशनों पर पाबंदियों और अक्टूबर के प्रदर्शनों का जिक्र

पुलिस ने 6 से 8 अक्टूबर के प्रदर्शनों के दौरान बसों में तोड़फोड़ और टायरों को नुकसान पहुंचाने का हवाला दिया। साथ ही, 10 अक्टूबर को संभावित कानून-व्यवस्था की समस्या के मद्देनजर 57 (बाद में घटाकर 45) मेट्रो स्टेशनों पर लगाई गई पाबंदियों को एहतियाती और जरूरी कदम बताया। पुलिस ने कहा कि रात 10 बजे तक पूरी मेट्रो सेवा बहाल कर दी गई थी।

अवमानना नोटिस खारिज करने का आग्रह

दिल्ली पुलिस कमिश्नर ने अदालत को बताया कि मार्च की अनुमति न देना और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेना सार्वजनिक शांति बनाए रखने के लिए आवश्यक था। पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के किसी भी तरह के जानबूझकर उल्लंघन से इनकार करते हुए अपने खिलाफ जारी अवमानना नोटिस को खारिज करने का अनुरोध किया है।