‘बिना वजह नाम नहीं हटाए’, 85,854 वोटरों के मामले में यूपी चुनाव आयोग की सफाई

navdeep rinva

उत्तर प्रदेश में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के दौरान फॉर्म-7 के जरिए बिना वजह 85,854 मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जाने के दावों को राज्य निर्वाचन आयोग ने पूरी तरह खारिज कर दिया है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर मंगलवार को बयान जारी करते हुए आयोग ने स्पष्ट किया कि ऑटोमैटिक सॉफ्टवेयर के जरिए फॉर्म-7 तैयार कर बड़े पैमाने पर नाम काटने की खबरें पूरी तरह भ्रामक और तथ्यहीन हैं।

सॉफ्टवेयर से स्वत: फॉर्म-7 जनरेट होने का दावा खारिज

सोशल मीडिया और विभिन्न रिपोर्टों में यह दावा किया जा रहा था कि चुनाव आयोग के सॉफ्टवेयर ने अपने आप 85,854 फॉर्म-7 जनरेट कर दिए और बिना किसी वैध कारण के मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए।

आयोग ने इस दावे का खंडन करते हुए कहा कि 85,854 फॉर्म-7 स्वतः (auto-generated) तैयार नहीं हुए हैं। यह दावा पूरी तरह भ्रामक है कि फॉर्म-7 में मतदाताओं के नाम काटने का कोई कारण दर्ज नहीं था। संबंधित सभी मामलों में नोटिस भेजने, सुनवाई करने, दस्तावेजों की जांच और सक्षम स्तर से औपचारिक आदेश पारित होने के बाद ही नियमानुसार कार्रवाई की गई है।

नोटिस और जांच के बाद अयोग्य पाए गए नाम

निर्वाचन आयोग के अनुसार, ये 85,854 मामले वे हैं जिनमें एसआईआर के दौरान जमीनी सत्यापन के बाद संबंधित व्यक्तियों को बाकायदा लिखित सूचना दी गई थी। सभी प्रभावित व्यक्तियों को अपने जरूरी दस्तावेज प्रस्तुत करने और पक्ष रखने का पूरा अवसर उपलब्ध कराया गया था।

जांच और सुनवाई के दौरान दस्तावेजों के परीक्षण में जो व्यक्ति मतदाता बनने के अयोग्य पाए गए, केवल उनके मामलों में ही औपचारिक आदेश अपलोड किए गए। आयोग ने स्पष्ट किया कि आदेश अपलोड होने के बाद ही सिस्टम में फॉर्म-7 जनरेट हुए थे।

6 मार्च के बाद के मामलों पर भी नियमों के तहत निर्णय

आयोग ने बताया कि मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया के तहत दावा और आपत्ति दर्ज कराने की निर्धारित समय-सीमा 6 जनवरी से 6 मार्च तक तय की गई थी। इस तय अवधि के बाद जो मामले लंबित रह गए थे, उन पर भी नियमों के तहत सुनवाई पूरी कर निर्णय लिए गए।

चुनाव आयोग ने नागरिकों से अपील की है कि वे इस तरह की अपुष्ट और भ्रामक खबरों पर बिना तथ्यों की पड़ताल किए भरोसा न करें। किसी भी प्रकार के संशय की स्थिति में केवल आधिकारिक स्रोतों से जारी सूचनाओं पर ही विश्वास करें।