‘मैं चवन्नी नहीं, ब्रज रज की एक चुटकी हूं…’: आगरा में अखिलेश यादव के तंज पर जयंत चौधरी का कड़ा और भावुक पलटवार

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 राष्ट्रीय लोकदल (RLD) के अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी ने उत्तर प्रदेश के आगरा जिले के फतेहपुर सीकरी के जैगारा में आयोजित ‘स्वाभिमान जनसभा’ को संबोधित किया। इस जनसभा में जयंत चौधरी ने समाजवादी पार्टी (SP) के मुखिया अखिलेश यादव का बिना नाम लिए, उनके चर्चित ‘चवन्नी’ वाले बयान पर तीखा और भावनात्मक पलटवार किया।

‘मैं तो चवन्नी भी नहीं, ब्रज रज की एक चुटकी हूं’

सभा को संबोधित करते हुए जयंत चौधरी ने कहा, “एक बात कहना चाहता हूं, बात कीमत की थी। जो लोग मुझे एक चवन्नी भी नहीं मान रहे, कह रहे हैं कि चवन्नी हूं… मैं उनको बताना चाहता हूं कि मैं तो चवन्नी भी नहीं। मैं अपने आप को ब्रज रज (ब्रज की मिट्टी) की एक चुटकी के लायक भी नहीं मानता हूं। ब्रज रज की अहमियत आप लोग जानते हैं।”

उन्होंने ब्रज की मिट्टी का महत्व बताते हुए एक चौपाई पढ़ी, “जिस ब्रज की रज के लिए कहा गया है कि ब्रज की रज में मिले यह रज… रज में यमुना नीर, धन्य भाग वो जीव के जो जामे तजे शरीर।” जयंत ने आगे कहा, “देश-दुनिया से आदमी यहां आता है और एक चुटकी मिट्टी अपने माथे पर लगाकर प्रसन्न होकर घर लौट जाता है।”

जयंत ने जनता से सीधा संवाद करते हुए कहा, “मैं उस माटी के बराबर भी नहीं हूं, और उस माटी के लाल मेरे सामने खड़े हैं। मैं जानता हूं कि मेरी लज्जा की रक्षा भी आप (जनता) ही कर सकते हो।”

‘वह तीर मुझ तक नहीं पहुंचा, अब उन्हें पछतावा हो रहा होगा’

जयंत चौधरी ने अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि सोशल मीडिया के इस जमाने में उन्होंने एक शिगूफा छोड़ा और कुछ वार करने की कोशिश की, लेकिन वह तीर उन तक नहीं पहुंच पाया।

उन्होंने कहा, “वह तीर ठीक नहीं बैठा। अब शायद उन्हें लगता होगा कि यह बात कही ही क्यों गई? शायद मुझे नहीं कहना चाहिए था।”

अखिलेश यादव को याद दिलाई अपनी कीमत

जयंत चौधरी ने अखिलेश को राजनीतिक रिश्तों की अहमियत समझाते हुए अपनी पार्टी की पुरानी ताकत और कीमत भी याद दिलाई।

उन्होंने कहा, “रिश्तों को निभाना नहीं सीखोगे, तो तुम्हारे साथ कौन खड़ा होगा? आज आप मुझे मेरी कीमत बताना चाहते हो, तो कीमत मैं बता देता हूं। यह दो-चार साल पुरानी बात है। जब हम साथ थे, तब उत्तर प्रदेश विधानसभा में लोकदल के कम विधायक होने के बावजूद आप (सपा) तीन राज्यसभा सांसद जिता ले जाते थे, और अबकी बार आप सिर्फ एक ही भेज पा रहे हो।”