उज्जैन ‘शाही मस्जिद’ विवाद: हाई कोर्ट से मस्जिद कमेटी को झटका, सड़क चौड़ीकरण के लिए टूटेगा हिस्सा

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मध्य प्रदेश हाई कोर्ट (MP High Court) ने उज्जैन में 2028 के सिंहस्थ कुंभ मेले (Simhastha 2028) से पहले सड़क चौड़ीकरण प्रोजेक्ट को हरी झंडी दे दी है। अदालत ने सोमवार को कंथल क्रॉसिंग से गोपाल मंदिर तक प्रस्तावित सड़क के रास्ते में आ रहे ‘शाही मस्जिद’ के एक हिस्से को गिराने के खिलाफ दायर अपील को खारिज कर दिया। कोर्ट ने मस्जिद प्रबंधन और उज्जैन नगर निगम के बीच हुए समझौते का संज्ञान लेते हुए कहा कि नगर निकाय द्वारा दिए गए वादे और आश्वासन लागू रहेंगे।

सिंहस्थ 2028: क्या है सड़क चौड़ीकरण प्रोजेक्ट?

उज्जैन में आगामी सिंहस्थ कुंभ मेले को देखते हुए बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को मजबूत किया जा रहा है।

  • कंथल क्रॉसिंग को गोपाल मंदिर से जोड़ने वाली इस महत्वपूर्ण सड़क को 15 मीटर चौड़ा किया जा रहा है।

  • यह पूरा प्रोजेक्ट तकरीबन 900 मीटर लंबा है।

  • अधिकारियों के मुताबिक, इस सड़क के रास्ते में आने वाली धार्मिक संपत्तियों सहित कुल 272 ढांचों को हटाने, बदलने या दूसरी जगह शिफ्ट करने की योजना है।

  • राज्य सरकार ने इस बड़े प्रोजेक्ट के लिए करीब 9.8 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है।

विरोध प्रदर्शन, पथराव और आंसू गैस

मस्जिद का हिस्सा हटाए जाने की योजना के विरोध में सोमवार, 28 सितंबर 2026 को इलाके में भारी तनाव फैल गया। तोड़फोड़ की कार्रवाई का विरोध कर रहे लोगों ने कथित तौर पर पुलिसकर्मियों पर पथराव कर दिया।

उज्जैन के पुलिस अधीक्षक (SP) प्रदीप शर्मा ने बताया कि कुछ लोगों ने जानबूझकर स्थिति बिगाड़ने की कोशिश की। पुलिस ने पहले प्रदर्शनकारियों को शांति बनाए रखने और सहयोग करने के लिए मनाने का प्रयास किया। लेकिन जब भीड़ बेकाबू होने लगी, तो उसे तितर-बितर करने के लिए सीमित बल का प्रयोग करते हुए आंसू गैस के गोले दागे गए। फिलहाल, किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए इलाके में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी गई है।

CM मोहन यादव ने खुद तोड़ा अपने पुश्तैनी घर का हिस्सा

सड़क चौड़ीकरण की इस मुहिम में किसी तरह का पक्षपात न हो, इसका संदेश देने के लिए 27 सितंबर 2026 को मुख्यमंत्री मोहन यादव ने खुद एक बड़ी मिसाल पेश की। सीएम मोहन यादव ने खुद कुदाल चलाकर उज्जैन में स्थित अपने पुश्तैनी घर का वह हिस्सा तोड़ दिया, जो इस प्रोजेक्ट की जद में आ रहा था।

मुख्यमंत्री ने इस मौके पर कहा कि जब विकास परियोजनाओं और जनता की भलाई के लिए ऐसी सख्त कार्रवाई की जरूरत होती है, तो जन-प्रतिनिधियों और सरकारी अधिकारियों को सबसे पहले आगे आकर मिसाल पेश करनी चाहिए।

इससे पहले 9 सितंबर 2026 को भी हाई कोर्ट ने शाही मस्जिद के हिस्से को हटाने की योजना को चुनौती देने वाली प्राथमिक याचिकाओं को खारिज कर दिया था। इसके बाद मस्जिद प्रशासन ने अपील के जरिए दोबारा कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जिस पर सोमवार को अंतिम सुनवाई करते हुए अदालत ने नगर निगम की कार्रवाई को सही ठहराया है।