CBSE के कक्षा 6 के छात्रों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत: थ्री लैंग्वेज पॉलिसी सख्ती से लागू करने पर रोक

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केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के स्कूलों में पढ़ने वाले कक्षा 6 के छात्रों और उनके अभिभावकों के लिए सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत भरी खबर आई है। शीर्ष अदालत ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए निर्देश दिया है कि मौजूदा कक्षा 6 के विद्यार्थियों पर अभी थ्री लैंग्वेज पॉलिसी (Three Language Policy) को सख्ती से थोपा नहीं जाएगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि वर्तमान बैच के बच्चों को भी कक्षा 7 के विद्यार्थियों की तरह इस नीति के अनिवार्य क्रियान्वयन से छूट प्रदान की जाएगी।

क्या है थ्री लैंग्वेज पॉलिसी का विवाद?

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF) के तहत सीबीएसई ने कक्षा 6 से तीन भाषाओं (R1, R2 और R3) का नया फॉर्मूला तय किया था, जिसमें कम से कम दो भारतीय भाषाओं को पढ़ना अनिवार्य किया गया है।

इस व्यवस्था को मौजूदा शैक्षणिक सत्र में अचानक लागू किए जाने के बाद याचिकाकर्ताओं और कई स्कूलों ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उनका मुख्य तर्क था कि बच्चे कक्षा 4 से ही अपनी पसंद की दूसरी भाषाएं पढ़ते आ रहे हैं। ऐसे में सत्र के बीच में अचानक उन पर नई या तीसरी भाषा चुनने का दबाव बनाना उनके शैक्षणिक प्रदर्शन और मानसिक संतुलन को सीधे तौर पर प्रभावित करेगा।

‘बच्चों को बेवजह परेशानी में न डालें’: सुप्रीम कोर्ट

मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बच्चों के मानसिक दबाव और पढ़ाई के संतुलन को सर्वोपरि माना। सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि अदालत बच्चों को किसी कठिनाई या असमंजस में डालने के बजाय उन्हें सुविधा और तैयारी का पर्याप्त समय देना चाहती है।

याचिकाकर्ताओं की ओर से यह दलील भी दी गई कि वेबसाइट पर किताबों का ऑनलाइन उपलब्ध होना और बच्चों के हाथों में वास्तविक किताबों का होना दो अलग बातें हैं। जमीनी हकीकत यह है कि R3 स्तर की किताबों की पर्याप्त आपूर्ति स्कूलों और बाजारों में नहीं हो पाई है।

सरकार की दलील बनाम अदालत का रुख

केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ के समक्ष तर्क रखा कि करीब 99 फीसदी स्कूलों में इस नई व्यवस्था को लागू करने की तैयारी पूरी हो चुकी है और करीब 2,800 में से महज 1.2 फीसदी स्कूलों में ही कुछ तकनीकी दिक्कतें हैं। इसलिए किसी तरह की छूट नहीं दी जानी चाहिए।

हालांकि, अदालत ने सरकार की इस दलील को दरकिनार करते हुए कहा कि मौजूदा बैच के छात्रों को तनावमुक्त माहौल मिलना जरूरी है, इसलिए उन्हें कक्षा 7 के छात्रों के समान ही छूट का लाभ दिया जाएगा।

छात्रों के लिए अब आगे क्या? सुप्रीम कोर्ट का यह निर्देश केवल मौजूदा कक्षा 6 के बैच के लिए फौरी राहत है, पूरी नीति को रद्द नहीं किया गया है। अदालत ने सभी पक्षों को अपना-अपना विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए 6 सप्ताह का समय दिया है, जिसके बाद मामले की अगली सुनवाई होगी।

संकेत दिए गए हैं कि इस नई व्यवस्था के सुचारू और अनिवार्य क्रियान्वयन पर आगे 1 अप्रैल 2027 से विचार किया जा सकता है, ताकि स्कूलों, प्रकाशकों और सबसे बढ़कर छात्रों को नई भाषा और पाठ्यक्रम के अनुकूल ढलने का पूरा समय मिल सके।