8 सीटों पर BJP की नजर, स्मृति ईरानी और केंद्रीय मंत्रियों समेत इन चेहरों की दावेदारी पर चर्चा तेज
उत्तर प्रदेश से राज्यसभा की 10 सीटों पर होने वाले आगामी चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के भीतर सियासी हलचल तेज हो गई है। हालांकि चुनाव में अभी समय बाकी है, लेकिन संभावित उम्मीदवारों के नामों को लेकर पार्टी गलियारों में मंथन का दौर शुरू हो चुका है। मौजूदा संख्या बल के लिहाज से भाजपा के खाते में अधिकतम 8 सीटें जाने की संभावना है। ऐसे में पार्टी के सामने पुराने चेहरों को दोबारा मौका देने और संगठन के नए नेताओं को उच्च सदन भेजने का संतुलन साधने की चुनौती है।
संभावित दावेदारों में पूर्व केंद्रीय मंत्री और हाल ही में राष्ट्रीय महासचिव बनीं स्मृति ईरानी से लेकर केंद्र सरकार के मौजूदा मंत्री और पार्टी संगठन से जुड़े कई वरिष्ठ नेता शामिल हैं।
7 सांसदों का कार्यकाल हो रहा खत्म, दिनेश शर्मा की सीट पहले से खाली
उत्तर प्रदेश से भाजपा के 7 राज्यसभा सांसदों का कार्यकाल समाप्त होने जा रहा है। इनमें शामिल प्रमुख नाम हैं:
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अरुण सिंह
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गीता शाक्य
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नीरज शेखर
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बृजलाल (पूर्व डीजीपी)
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बीएल वर्मा (केंद्रीय मंत्री)
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सीमा द्विवेदी
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हरदीप सिंह पुरी (केंद्रीय मंत्री)
इसके अलावा, पूर्व उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा को अंडमान और निकोबार का उपराज्यपाल (LG) बनाए जाने के बाद उनकी एक सीट पहले ही रिक्त हो चुकी है।
केंद्रीय मंत्रियों के भविष्य पर निगाहें: बीएल वर्मा और हरदीप पुरी
मौजूदा सांसदों में बीएल वर्मा और हरदीप सिंह पुरी केंद्र सरकार में मंत्री पद संभाल रहे हैं। राजनीतिक चर्चाओं के अनुसार, यदि आगामी कैबिनेट फेरबदल के बाद दोनों मंत्री बने रहते हैं, तो उन्हें दोबारा राज्यसभा भेजे जाने की प्रबल संभावना है।
बीएल वर्मा उत्तर प्रदेश की राजनीति में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), विशेषकर लोधी समाज का प्रमुख चेहरा हैं। केंद्रीय नेतृत्व से नजदीकी और जातीय समीकरणों के चलते उनके दोबारा संसद जाने की चर्चा जोरों पर है।
वहीं केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी 74 वर्ष के हो चुके हैं। पंजाब के राजनीतिक समीकरणों और सिख समुदाय के बीच पार्टी की पकड़ को देखते हुए उन्हें फिर मौका मिलने की बात कही जा रही है, हालांकि उम्र का पहलू उनके चयन में एक अहम कारक माना जा रहा है।
स्मृति ईरानी और हरीश द्विवेदी के नामों की गूंज
हाल ही में भाजपा की राष्ट्रीय महासचिव बनाई गईं स्मृति ईरानी का नाम भी यूपी से राज्यसभा भेजे जाने को लेकर चर्चा में बना हुआ है। संगठन में उन्हें हरियाणा और छत्तीसगढ़ जैसे अहम राज्यों की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है।
इसके साथ ही, उत्तर प्रदेश में भाजपा के प्रमुख ब्राह्मण चेहरों में गिने जाने वाले हरीश द्विवेदी का नाम भी दावेदारों में शामिल है। संगठन में लगातार बढ़ती जिम्मेदारियों के बीच उन्हें उच्च सदन भेजे जाने की अटकलें लगाई जा रही हैं।
जातीय समीकरण: दलित, ओबीसी और ब्राह्मण संतुलन
पार्टी के भीतर जातीय संतुलन साधने को लेकर भी मंथन जारी है:
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बृजलाल: पूर्व आईपीएस और यूपी के पूर्व डीजीपी बृजलाल का कार्यकाल भी समाप्त हो रहा है। दलित समुदाय से आने वाले बृजलाल मुखर वक्ता हैं और यूपी अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष भी रह चुके हैं।
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सीमा द्विवेदी: जौनपुर से तीन बार विधायक रह चुकीं सीमा द्विवेदी एक मजबूत ब्राह्मण चेहरा हैं। आगामी विधानसभा चुनावों में उनकी भूमिका को देखते हुए उनके नाम पर विचार किया जा रहा है।
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गीता शाक्य: भाजपा ओबीसी मोर्चा की पूर्व अध्यक्ष गीता शाक्य को भी दोबारा मौका दिए जाने की संभावनाओं पर चर्चा चल रही है।
नीरज शेखर और अरुण सिंह की स्थिति
पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के पुत्र नीरज शेखर का कार्यकाल भी पूरा हो रहा है। समाजवादी पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल होने के बाद पार्टी ने उन्हें राज्यसभा भेजा था, और अब उनके दोबारा नामांकन को लेकर शीर्ष नेतृत्व को निर्णय लेना है।
वहीं, भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह भी मजबूत दावेदारों में गिने जा रहे हैं। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के रिश्तेदार अरुण सिंह लंबे समय तक संगठन में अहम जिम्मेदारियों का निर्वहन कर चुके हैं।
पार्टी सूत्रों के हवाले से चल रही चर्चाओं के मुताबिक, भाजपा अपने कोटे की संभावित 8 सीटों में से 4 से 5 सीटों पर नए चेहरों को मौका दे सकती है। हालांकि, टिकटों को लेकर अंतिम तस्वीर पार्टी आलाकमान द्वारा उम्मीदवारों के आधिकारिक ऐलान के बाद ही साफ होगी।
